करियट्ठी फ़िल्म रिव्यू भोजपुरी में

भारत भले आज़ाद हो गइल होखे, बाकिर अंगरेजन के बनावल मानसिकता से अबहियो आज़ाद ना भइल बा। आज हिंदुस्तान में रंगभेद, समाज के नज़रिया, प्रभाव और दबाव ई सब के उजागर करे वाली एगो दमदार फिल्म “करियट्ठी” 31 जनवरी के भारत सरकार के ओटीटी प्लेटफॉर्म “वेव” पर रिलीज भइल बा।
एह फिल्म के निर्देशक नितिन चंद्रा रंगभेद के खिलाफ समाज में चले वाला संघर्ष, दर्द आ पीड़ा के बड़ा शानदार तरीका से देखवले बानी। ई नितिन चंद्रा के चौथी फिल्म ह। फिल्म के मुख्य भूमिका में स्नेहा पलवी बाड़ी, जे कौशल्या नाम के औरत के किरदार में नज़र आईल बाड़ी। कौशल्या के तीन गो बेटी बाड़ी स, बाकिर ओकरा घर में लोग बेटा ना होखला के ताना मारेला। सबसे बड़का बात ई कि ओकरा तीन बेटी में से एक के रंग काला बा। रंग आ लिंग के आधार पर समाज से मिलत ताने के बीच कौशल्या आपन घर आ दुनिया से संघर्ष करेली। स्नेहा पलवी आपन किरदार बहुत ही बढ़िया तरीका से निभवले बाड़ी।
कहानी (Story)
“करियट्ठी” एगो ब्राह्मण परिवार के सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म बा। ई परिवार में एगो काली लइकी जनम लेले बिया, जेकरा के घर के लोग आ समाज दूनो तरफ से घृणा मिले ला। बाकिर ओ लइकी आपन मेहनत आ धैर्य से जिनगी में सफलता के ऊँचाई छू लेले बिया। लेकिन कहानी सोच से परे बा
फिल्म के एगो दमदार डायलॉग –
“का कहीं ए चाची, बाभन घरे ई करिया मुसरी जनमल बिया?”
ई संवाद समाज में रंगभेद, भेदभाव आ मानसिकता के सही तरीका से दर्शवाले बा ।
अभिनय (Acting)
फिल्म के मुख्य किरदार अन्नू प्रिया निभवले बाड़ी, जे अपना अभिनय से फिल्म में जान डाल देले बाड़ी। फिल्म के एगो डायलॉग जवन दिल छू लेला –
“करिया बहुत सुंदर रंग होला, अगर रात करिया ना होखे त चंद आपन खूबसूरती पर इतराइत…” आगे बहुत बढ़िया बढ़िया डायलॉग बा जवाब दिल के छु लेवे ला
आख़िरी में कहत बड़ी “लोग उज्जर केस के करिया और करिया चेहरा के उज्जर काहे करे के चाहेला”
अन्नू प्रिया के साथ-साथ दीपक सिंह, सुषमा सिन्हा, संजय सिंह, अक्षय दिव्यकीर्ति आ अउरी कलाकार लोग आपन-आपन किरदार में जान डाल देले बाड़े।
निर्देशन (Direction)
नितिन नीरा चंद्रा रंगभेद के दर्द आ संघर्ष के फिल्म में बखूबी देखवले बानी। ई फिल्म सरोज सिंह के लिखल एगो लघु कहानी पर आधारित बा, जेकरा के नितिन चंद्रा प्रभावी तरीका से पर्दे पर उतरले बानी।
संगीत आ बैकग्राउंड म्यूजिक (Music & Background Score)
फिल्म में देहाती संस्कृति के सुंदर झलक मिले ला। खासकर चंदन तिवारी के गावल गीत “हरदिया” (हल्दिया) बिहार के रीति-रिवाज के सजीव बना देला।फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहानी के इमोशन से जोर के रखेला।
सिनेमेटोग्राफी आ तकनीकी पक्ष (Cinematography & Technical Aspects)
फिल्म के सिनेमेटोग्राफी, एडिटिंग आ सन् और सीन के हिसाब से कलर ग्रेडिंग बाकी और सब पहलू सीमित बजट में बढ़िया तरीका से प्रस्तुत भइल बा।
विशेषताएँ आ कमजोरियाँ (Strengths & Weaknesses)
फायदा:
फिल्म समाज में प्रचलित एक ठो गंभीर मुद्दा – रंगभेद – के सटीक तरीका से देखावेला।
बिहार के असली लोकेशन आ कलाकार फिल्म के आउरी वास्तविक बनावेला।
फिल्म कहानी से दर्शक के पूरा समय जोड़ के रखेला।
कमजोरी:
•सीमित बजट के कारण तकनीकी पक्ष में कुछ कमी देखे के मिलेला।
•1970-80 के गांव में बिजली के तार के मौजूदगी एगो गलती बा, जवन पोस्ट-प्रोडक्शन में सुधारल जा सकेला।
•फिल्म के प्रचार-प्रसार बहुत कम भइल, जवना से मुख्यधारा के दर्शक तक ना पहुँच पवले बा।
निष्कर्ष (Conclusion)
“करियट्ठी” एगो ताजा हवा के झोंका नियन बा, जे समाज के कड़वा सच उजागर करे ला। ई फिल्म खाली मनोरंजन ना देला, बलुक दर्शकन के सोचेला मजबूर करेला। भोजपुरी, मैथिली आ हिंदी भाषी दर्शकन के ई फिल्म जरूर देखे के चाहीं। शत-प्रतिशत ई फिल्म आपन जगह से हिलावे ना दी, ना बोर होखे दी। ई फ़िल्म के अपना माई बाप, भाई बहिन, देवर भौजाई, सबके संघे देख सकत बनी लोग