इस भौतिक जगत में जितनी भी भोग विलासी वस्तुएं है केवल इस भौति

इस भौतिक जगत में जितनी भी भोग विलासी वस्तुएं है केवल इस भौतिक जगत में ही काम आ सकती है मात्र पुण्यों और सत्कर्मों को ही आपकी आत्मा ग्रहण करती है।
RJ Anand Prajapati
इस भौतिक जगत में जितनी भी भोग विलासी वस्तुएं है केवल इस भौतिक जगत में ही काम आ सकती है मात्र पुण्यों और सत्कर्मों को ही आपकी आत्मा ग्रहण करती है।
RJ Anand Prajapati