जमहूरियत का जश्न मनाते हैं हम सभी
जमहूरियत का जश्न मनाते हैं हम सभी
नफरत के सब निशान मिटाते हैं हम सभी
गांधी हमीद बोस भगत सिंह या कलाम
बच्चों को उनकी राह चलाते हैं हम सभी
सींचा था जान दे के शहीदों ने मुल्क को
जज्बे को उनके शीश नवाते हैं हम सभी
अब कोई गीत और न संगीत छेड़िए
नगमे बहादुरी के सुनाते हैं हम सभी
छूना है हम सभी को तरक्की का आसमां
माहौल मिल के ऐसा बनाते हैं हम सभी
“अरशद” इबादतों में भी ताजीमे मुल्क है
मिट्टी पे इसकी सर को झुकाते हैं हम सभी
जमहूरियत=गणतंत्र