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21 Jan 2025 · 1 min read

जमहूरियत का जश्न मनाते हैं हम सभी

जमहूरियत का जश्न मनाते हैं हम सभी
नफरत के सब निशान मिटाते हैं हम सभी

गांधी हमीद बोस भगत सिंह या कलाम
बच्चों को उनकी राह चलाते हैं हम सभी

सींचा था जान दे के शहीदों ने मुल्क को
जज्बे को उनके शीश नवाते हैं हम सभी

अब कोई गीत और न संगीत छेड़िए
नगमे बहादुरी के सुनाते हैं हम सभी

छूना है हम सभी को तरक्की का आसमां
माहौल मिल के ऐसा बनाते हैं हम सभी

“अरशद” इबादतों में भी ताजीमे मुल्क है
मिट्टी पे इसकी सर को झुकाते हैं हम सभी
जमहूरियत=गणतंत्र

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