सुप्रभात

सुप्रभात
भटकते फिर रहे थे हम खुशी अब हाथ आई है
नही ये एक दिन की है ये बरसों की कमाई है
निराशा में न आशा को कभी भी छोड़ देना तुम
हमारी ज़िंदगी ने बात ये हमको सिखाई है
डॉ अर्चना गुप्ता
सुप्रभात
भटकते फिर रहे थे हम खुशी अब हाथ आई है
नही ये एक दिन की है ये बरसों की कमाई है
निराशा में न आशा को कभी भी छोड़ देना तुम
हमारी ज़िंदगी ने बात ये हमको सिखाई है
डॉ अर्चना गुप्ता