जब तुम नहीं कुछ माॅंगते हो तो ज़िंदगी बहुत कुछ दे जाती है।
सन्दर्भरहित कमेंट अनमना विहाह जेना होइत अछि जाहि मे मित्रतता
*क्या कर लेगा इंद्र जब, खुद पर निर्भर लोग (कुंडलिया)*
ग़ज़ल-ईश्क इबादत का बयां होता है
जब व्यक्ति वर्तमान से अगले युग में सोचना और पिछले युग में जी
कैसा कोलाहल यह जारी है....?
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
दूरियों से ही इत्तिफ़ाक़ रहा,
ऐ साँझ ,तू क्यूँ सिसकती है .......
🐍भुजंगी छंद🐍 विधान~ [यगण यगण यगण+लघु गुरु] ( 122 122 122 12 11वर्ण,,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]
(((((((((((((तुम्हारी गजल))))))
पुरुष परास्त हुआ है वहां जहां उसने अपने हृदय को पूर्ण समर्पि
धड़कने अब मेरी मेरे बस में नही
दर्द ना अश्कों का है ना ही किसी घाव का है.!