Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jul 2024 · 1 min read

दिलवालों के प्यार का, मौसम है बरसात ।

दिलवालों के प्यार का, मौसम है बरसात ।
कैसे माने दिल भला, मचल रहे जज्बात ।
मिलने की बेताबियाँ, नजरों के अनुरोध –
कब माने प्रतिबंध को, अधरों के उत्पात ।

सुशील सरना / 8-7-24

185 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

खोखले शब्द
खोखले शब्द
Dr. Rajeev Jain
स्नेहिल वर्ण पिरामिड
स्नेहिल वर्ण पिरामिड
Rambali Mishra
अगहन माह के प्रत्येक गुरुवार का विशेष महत्व है। इस साल 21 नव
अगहन माह के प्रत्येक गुरुवार का विशेष महत्व है। इस साल 21 नव
Shashi kala vyas
'कोहरा' (मनहरण घनाक्षरी)
'कोहरा' (मनहरण घनाक्षरी)
Godambari Negi
यारो ऐसी माॅं होती है, यारो वो ही माॅं होती है।
यारो ऐसी माॅं होती है, यारो वो ही माॅं होती है।
सत्य कुमार प्रेमी
ग़ज़ल...
ग़ज़ल...
आर.एस. 'प्रीतम'
करना कर्म न त्यागें
करना कर्म न त्यागें
महेश चन्द्र त्रिपाठी
श्रमिक
श्रमिक
Dr. Bharati Varma Bourai
समाजों से सियासत तक पहुंची
समाजों से सियासत तक पहुंची "नाता परम्परा।" आज इसके, कल उसके
*प्रणय प्रभात*
अकेलापन
अकेलापन
Shashi Mahajan
सूखी लकड़ियों में, वो बात कहाँ ।
सूखी लकड़ियों में, वो बात कहाँ ।
श्याम सांवरा
हम है बच्चे भोले-भाले
हम है बच्चे भोले-भाले
राकेश चौरसिया
सफलता तुम्हें मुफ्त में नहीं मिलेगी...
सफलता तुम्हें मुफ्त में नहीं मिलेगी...
Education Academic by Aslam sir
शिव के द्वार चलें
शिव के द्वार चलें
Sudhir srivastava
पग न अब पीछे मुड़ेंगे...
पग न अब पीछे मुड़ेंगे...
डॉ.सीमा अग्रवाल
अफ़सोस
अफ़सोस
Shekhar Chandra Mitra
"यही दुनिया है"
Dr. Kishan tandon kranti
जिद शत्रु बन जाता है,
जिद शत्रु बन जाता है,
Buddha Prakash
खुद से ही बगावत
खुद से ही बगावत
Iamalpu9492
हे निराकार दिव्य ज्योति
हे निराकार दिव्य ज्योति
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
"गुरु का ज्ञान"
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
बारिश की बूँदें
बारिश की बूँदें
प्रो ० स्मिता शंकर
मेरी तृष्णा
मेरी तृष्णा
Seema Verma
अपने खुद के राज बताने लगता है
अपने खुद के राज बताने लगता है
दीपक बवेजा सरल
मुक्तक
मुक्तक
sushil sarna
"समाज विरोधी कृत्य कर रहे हैं ll
पूर्वार्थ
फीकी फीकी है हरियाली
फीकी फीकी है हरियाली
Dr Archana Gupta
आओ मिलकर सुनाते हैं एक दूसरे को एक दूसरे की कहानी
आओ मिलकर सुनाते हैं एक दूसरे को एक दूसरे की कहानी
सोनम पुनीत दुबे "सौम्या"
फ़ितरत को ज़माने की, ये क्या हो गया है
फ़ितरत को ज़माने की, ये क्या हो गया है
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
अनमोल है ज़िन्दगी
अनमोल है ज़िन्दगी
Seema gupta,Alwar
Loading...