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19 Mar 2024 · 1 min read

गीतिका …..

गीतिका
आधार छंद – चौपई (जयकरी छंद )-15 मात्रिक -पदात-गाल

साँसें जीवन का शृंगार ।
बिना साँस सजती दीवार ।

कब जीवित का होता मान ,
चित्रों को पूजे संसार ।

मिलता अपनों से आघात ,
इनका प्यार लगे बेकार ।

पल-पल रिश्ते बदलें रूप ,
मतभेदों से पड़ी दरार ।

बड़ा अजब जग का दस्तूर ,
भरे प्यार में ये अंगार ।

सुशील सरना /

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