पछुआ हवा
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
Why cheating, breakups and divorces are more.?
बिना दूरी तय किये हुए कही दूर आप नहीं पहुंच सकते
मोहब्बत की आख़िरी हद, न कोई जान पाया,
जिन्दगी सदैव खुली किताब की तरह रखें, जिसमें भावनाएं संवेदनशी
हम उनकी भोली सूरत पर फिदा थे,
एक नम्बर सबके फोन में ऐसा होता है
उगें हरे संवाद, वर्तमान परिदृश्य पर समग्र चिंतन करता दोहा संग्रह।
*सहकारी युग हिंदी साप्ताहिक के प्रारंभिक पंद्रह वर्ष*
कलयुग के बाबा
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
इश्क़ में तू चाल भी इस क़दर चलना,
जुल्म कितना भी बुलंदी पर हो.
घायल नागिन शेरनी,या अपमानित नार