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13 Feb 2024 · 1 min read

🍁अंहकार🍁

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

हे ज़मीं के पंछी न कर काया पर अहंकार
एक दिन मृतक बन मिट्टी में मिल जाना हैं॥

हे ज़मीं के पंछी न कर माया पर अहंकार
एक दिन सब छोड़ दूर कही चले जाना हैं॥

हे ज़मीं के पंछी न कर मीठी बोली पर अहंकार
एक दिन झूठे बोल छोड़ जग से चले जाना हैं॥

हे ज़मीं के पंछी न कर मोह पर अहंकार
एक दिन नाता तोड़ सभी रिश्तों से दूर चले जाना हैं॥

रचनाकार – 😇 डॉ० वैशाली ✍🏻

Language: Hindi
98 Views
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