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2 Feb 2017 · 1 min read

ग़ज़ल /गीतिका

जो गया जग छोड़कर, उसको कभी आना नहीं
वह शरण में है रब के, कोई और का प्यारा नहीं |

झिलमिलाता चौंधियाना चीज़ जिसमे है चमक
दीखता है दीप्त पर वह तो खरा सोना नहीं |

आज कल औलाद अपना सुख जो पहले देखते
वो तुम्हारा आसरा होता कभी अपना नहीं |

साँप है ज़हरीला, जोखिम से भरा वह जंतु, पर
आदमी से बड़ा, कोई साँप ज़हरीला नहीं |

वो खड़े तो हो गए दंगल में, जनता क्या करे
नेताजी का पीछला इतिहास अनजाना नहीं |

कर मिलाया भ्रष्ट रिश्वत खोर से गुंडागिरी
जानलो इसको छुपाया खोखला सौदा नहीं |

कालीपद ‘प्रसाद’

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