Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Jan 2024 · 2 min read

मुझे हर वो बच्चा अच्छा लगता है जो अपनी मां की फ़िक्र करता है

मुझे हर वो बच्चा अच्छा लगता है
जो अपनी मां की फ़िक्र करता है ,

उसके गिरने से पहले
मां उसको संभाल लेती थी
उसकी भूख उससे पहले
वो जान लेती थी ,
वो भी अपनी मां के हाथों को
लड़खड़ाने से पहले थाम लेता है
उसकी प्लेट में जो कम है
उसको उसमें डाल देता है ,

मुझे हर वो बच्चा अच्छा लगता है
जो अपनी मां की फ़िक्र करता है ,

मां बचपन से जैसे उसको
अपने से ज़्यादा जान लेती है
बिना कुछ बोले उसकी
हर बात सुन लेती है ,
वो भी जब उसके माथे की लकीरों को
बड़े ही आराम से पढ़ लेता है
उसके दिनभर बोलने के बाद भी
उसकी अनकही बातें समझ लेता है ,

मुझे हर वो बच्चा अच्छा लगता है
जो अपनी मां की फ़िक्र करता है ,

ये नाल का जो रिश्ता है
शब्दों में कहां बंधा है
एक दूसरे की फ़िक्र में ही तो
संपूर्ण जीवन सधा है ,
उसकी धड़कन मैं सुनती थी
वो अब मेरी सुनता है
मैं नींद से उठ ना जाऊं
वो दरवाज़ा धीरे से खोलता है ,

मुझे हर वो बच्चा अच्छा लगता है
जो अपनी मां की फ़िक्र करता है ,

जिस नाल ने उसको
कोख के अंदर जीवित रखा था
दुनिया में आने के बाद
उसकी हिम्मत परखा था ,
उस नाल को अपनी फिक्र के ज़रिए
उसने फिर से जोड़ दिया है
मां ने उसको जीवन दिया था
अब उसने मां को जीवन दिया है ,

मुझे हर वो बच्चा अच्छा लगता है
जो अपनी मां की फ़िक्र करता है ।

स्वरचित एवं मौलिक
( ममता सिंह देवा )

67 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जो बीत गया उसे जाने दो
जो बीत गया उसे जाने दो
अनूप अम्बर
कविता-शिश्कियाँ बेचैनियां अब सही जाती नहीं
कविता-शिश्कियाँ बेचैनियां अब सही जाती नहीं
Shyam Pandey
बाबा भीम आये हैं
बाबा भीम आये हैं
gurudeenverma198
ये ज़िंदगी
ये ज़िंदगी
Shyam Sundar Subramanian
मुनाफे में भी घाटा क्यों करें हम।
मुनाफे में भी घाटा क्यों करें हम।
सत्य कुमार प्रेमी
विषम परिस्थितियों से डरना नहीं,
विषम परिस्थितियों से डरना नहीं,
Trishika S Dhara
#लघुकथा
#लघुकथा
*Author प्रणय प्रभात*
If life is a dice,
If life is a dice,
DrChandan Medatwal
👨‍🎓मेरा खाली मटका माइंड
👨‍🎓मेरा खाली मटका माइंड
Ms.Ankit Halke jha
इस नयी फसल में, कैसी कोपलें ये आयीं है।
इस नयी फसल में, कैसी कोपलें ये आयीं है।
Manisha Manjari
समय सबों को बराबर मिला है ..हमारे हाथों में २४ घंटे रहते हैं
समय सबों को बराबर मिला है ..हमारे हाथों में २४ घंटे रहते हैं
DrLakshman Jha Parimal
ज़िंदा हूं
ज़िंदा हूं
Sanjay ' शून्य'
तेरे दरबार आया हूँ
तेरे दरबार आया हूँ
Basant Bhagawan Roy
💐प्रेम कौतुक-434💐
💐प्रेम कौतुक-434💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हर इंसान को भीतर से थोड़ा सा किसान होना चाहिए
हर इंसान को भीतर से थोड़ा सा किसान होना चाहिए
ruby kumari
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Phool gufran
स्वच्छंद प्रेम
स्वच्छंद प्रेम
Dr Parveen Thakur
मेरी माटी मेरा देश भाव
मेरी माटी मेरा देश भाव
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
मार मुदई के रे... 2
मार मुदई के रे... 2
जय लगन कुमार हैप्पी
शिक्षित बेटियां मजबूत समाज
शिक्षित बेटियां मजबूत समाज
श्याम सिंह बिष्ट
स्त्री-देह का उत्सव / MUSAFIR BAITHA
स्त्री-देह का उत्सव / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
*बोलो चुकता हो सका , माँ के ऋण से कौन (कुंडलिया)*
*बोलो चुकता हो सका , माँ के ऋण से कौन (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
उर्वशी की ‘मी टू’
उर्वशी की ‘मी टू’
Dr. Pradeep Kumar Sharma
क्या मिटायेंगे भला हमको वो मिटाने वाले .
क्या मिटायेंगे भला हमको वो मिटाने वाले .
Shyamsingh Lodhi (Tejpuriya)
सोच बदलनी होगी
सोच बदलनी होगी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
2451.पूर्णिका
2451.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
* भोर समय की *
* भोर समय की *
surenderpal vaidya
dr arun kumar shastri
dr arun kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मैं घाट तू धारा…
मैं घाट तू धारा…
Rekha Drolia
रुलाई
रुलाई
Bodhisatva kastooriya
Loading...