Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Jul 2022 · 1 min read

मन चाहे कुछ कहना….!

मन चाहे कुछ कहना,
फिर सोचूँ अच्छा है चुप रहना,
देख – देखकर आज की दुनिया के हालात,
मन में उठते रहते अनगिनत झँझावात,
कभी लगे जरूरी इन्हें रूप शब्दों का देना।
फिर सोचूँ अच्छा है चुप रहना।
मन चाहे कुछ …..!
लूट, डकैती, भ्रष्टाचार,
बढ़ते जुर्म, बढ़ता अत्याचार,
कैसे कहूँ कितना मुश्किल है सब सहना।
फिर सोचूँ अच्छा है चुप रहना।
मन चाहे कुछ ….!
अभी – अभी उठा मन में यह विचार,
खामोशी से लग पाएगी क्या नैया पार,
नहीं तो क्यों न थामूँ कलम रूपी पतवार,
कायरता है इस तरह मूक बने रहना।
फिर सोचूँ अच्छा है चुप रहना !
मन चाहे कुछ …….!
रचनाकार:- कंचन खन्ना,
मुरादाबाद, (उ०प्र०, भारत) ।
सर्वाधिकार, सुरक्षित (रचनाकार)
दिनांक :- २३.०९.२०१६.

Language: Hindi
1 Like · 258 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Kanchan Khanna
View all
You may also like:
बरखा
बरखा
Dr. Seema Varma
मातृत्व
मातृत्व
साहित्य गौरव
तुझमें : मैं
तुझमें : मैं
Dr.Pratibha Prakash
अभी तक हमने
अभी तक हमने
*Author प्रणय प्रभात*
जमाने में
जमाने में
manjula chauhan
मिलन
मिलन
Bodhisatva kastooriya
भूमि दिवस
भूमि दिवस
SATPAL CHAUHAN
किया आप Tea लवर हो?
किया आप Tea लवर हो?
Urmil Suman(श्री)
2260.
2260.
Dr.Khedu Bharti
क्यों प्यार है तुमसे इतना
क्यों प्यार है तुमसे इतना
gurudeenverma198
सर्दी और चाय का रिश्ता है पुराना,
सर्दी और चाय का रिश्ता है पुराना,
Shutisha Rajput
ध्यान सारा लगा था सफर की तरफ़
ध्यान सारा लगा था सफर की तरफ़
अरशद रसूल बदायूंनी
// कामयाबी के चार सूत्र //
// कामयाबी के चार सूत्र //
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
"अश्क भरे नयना"
Ekta chitrangini
* चान्दनी में मन *
* चान्दनी में मन *
surenderpal vaidya
Khahisho ke samandar me , gote lagati meri hasti.
Khahisho ke samandar me , gote lagati meri hasti.
Sakshi Tripathi
Kashtu Chand tu aur mai Sitara hota ,
Kashtu Chand tu aur mai Sitara hota ,
Sampada
यादों की सुनवाई होगी
यादों की सुनवाई होगी
Shweta Soni
बूढ़ी माँ .....
बूढ़ी माँ .....
sushil sarna
जो जिस चीज़ को तरसा है,
जो जिस चीज़ को तरसा है,
Pramila sultan
होली
होली
Dr Archana Gupta
ख़ुद्दार बन रहे हैं पर लँगड़ा रहा ज़मीर है
ख़ुद्दार बन रहे हैं पर लँगड़ा रहा ज़मीर है
पूर्वार्थ
बहुत वो साफ सुधरी ड्रेस में स्कूल आती थी।
बहुत वो साफ सुधरी ड्रेस में स्कूल आती थी।
विजय कुमार नामदेव
चेहरे की पहचान ही व्यक्ति के लिये मायने रखती है
चेहरे की पहचान ही व्यक्ति के लिये मायने रखती है
शेखर सिंह
सितारा
सितारा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
*बच्चों को ले घूमते, मॅंगवाते हैं भीख (कुंडलिया)*
*बच्चों को ले घूमते, मॅंगवाते हैं भीख (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
जुड़वा भाई ( शिक्षाप्रद कहानी )
जुड़वा भाई ( शिक्षाप्रद कहानी )
AMRESH KUMAR VERMA
’बज्जिका’ लोकभाषा पर एक परिचयात्मक आलेख / DR. MUSAFIR BAITHA
’बज्जिका’ लोकभाषा पर एक परिचयात्मक आलेख / DR. MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
गुरु सर्व ज्ञानो का खजाना
गुरु सर्व ज्ञानो का खजाना
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
"सुन लो"
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...