Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Mar 2024 · 1 min read

बेवजह यूं ही

बेवजह यूं ही प्यार तुम से हो गया।
एक अदद दिल था ,वो भी खो गया।

रात बातों बातों में जिक्र तेरा जब हुआ
सोचता हूं ये दिल , जाने तेरा कब हुआ।

अपनी आवारगी छोड़ हम दीवाने बने
मत पूछ इस बात पर कितने अफसाने बने।

जिस रोज़ दिन निकलते दीद तेरी हो जाती
इतने खुश हम होते मानो ईद हो जाती।

देख कर तुम्हें दिल की धड़कनें बढ़ गई
बिन पीये ही जैसे बोतल पूरी चढ़ गई।

लिखते लिखते जाने ये कविता कैसे बनी
सोच कर देखा तो खुद की खुद से ठनी।

ऐसे ही अल्फाजों को मैंने बिखरा सा दिया
लोग कहने लगे अरे,काम तूने अच्छा किया

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
50 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Surinder blackpen
View all
You may also like:
अंगुलिया
अंगुलिया
Sandeep Pande
आ जा उज्ज्वल जीवन-प्रभात।
आ जा उज्ज्वल जीवन-प्रभात।
Anil Mishra Prahari
*मुख काला हो गया समूचा, मरण-पाश से लड़ने में (हिंदी गजल)*
*मुख काला हो गया समूचा, मरण-पाश से लड़ने में (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
जीवन का सफ़र कल़म की नोंक पर चलता है
जीवन का सफ़र कल़म की नोंक पर चलता है
प्रेमदास वसु सुरेखा
जीवन - अस्तित्व
जीवन - अस्तित्व
Shyam Sundar Subramanian
शूद्र व्यवस्था, वैदिक धर्म की
शूद्र व्यवस्था, वैदिक धर्म की
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
23/190.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/190.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कितना और बदलूं खुद को
कितना और बदलूं खुद को
इंजी. संजय श्रीवास्तव
आस्था विश्वास पर ही, यह टिकी है दोस्ती।
आस्था विश्वास पर ही, यह टिकी है दोस्ती।
अटल मुरादाबादी, ओज व व्यंग कवि
इंसानियत
इंसानियत
Sunil Maheshwari
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
दुनियाँ की भीड़ में।
दुनियाँ की भीड़ में।
Taj Mohammad
सहयोग आधारित संकलन
सहयोग आधारित संकलन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
बाबा मुझे पढ़ने दो ना।
बाबा मुझे पढ़ने दो ना।
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
स्त्री का सम्मान ही पुरुष की मर्दानगी है और
स्त्री का सम्मान ही पुरुष की मर्दानगी है और
Ranjeet kumar patre
■ आज का शेर-
■ आज का शेर-
*प्रणय प्रभात*
स्नेह की मृदु भावनाओं को जगाकर।
स्नेह की मृदु भावनाओं को जगाकर।
surenderpal vaidya
सुख -दुख
सुख -दुख
Acharya Rama Nand Mandal
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
सब लोग जिधर वो हैं उधर देख रहे हैं
Rituraj shivem verma
बरस  पाँच  सौ  तक रखी,
बरस पाँच सौ तक रखी,
Neelam Sharma
Dad's Tales of Yore
Dad's Tales of Yore
Natasha Stephen
सुविचार
सुविचार
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
- रिश्तों को में तोड़ चला -
- रिश्तों को में तोड़ चला -
bharat gehlot
कविता
कविता
Rambali Mishra
"कहानी मेरी अभी ख़त्म नही
पूर्वार्थ
"विदाई की बेला में"
Dr. Kishan tandon kranti
केहिकी करैं बुराई भइया,
केहिकी करैं बुराई भइया,
Kaushal Kumar Pandey आस
बेटी को जन्मदिन की बधाई
बेटी को जन्मदिन की बधाई
लक्ष्मी सिंह
Loading...