Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Feb 2024 · 1 min read

बेजुबान तस्वीर

बेज़ुबां होती कहाँ तस्वीर है।
बोलती तस्वीर की तहरीर है।

सोच ना कमज़ोर औरत को कभी
फूल सी नाज़ुक मगर शम़शीर है।

आज हिम्मत कर ज़रा औ तोड़ दे
बेबसी की पाँव जो ज़ंजीर है।

आसमां किसको मिला पूरा कभी
पर बनी तद़बीर से तक़दीर है।

क्या कहें क्या क्या सहा है इश्क में
आँख मेरे दर्द की तफ़्सीर है।

साथ पूरा था अधूरा ही सही
याद तेरी बस मेरी जागीर है।

दे दिया जो भी था मेरे पास में
हाँ यही ‘नीलम’ अलग तासीर है।

नीलम शर्मा ✍️

Language: Hindi
2 Likes · 58 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
हे परम पिता परमेश्वर,जग को बनाने वाले
हे परम पिता परमेश्वर,जग को बनाने वाले
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
पढ़ो लिखो आगे बढ़ो...
पढ़ो लिखो आगे बढ़ो...
डॉ.सीमा अग्रवाल
माता सिद्धि-प्रदायिनी ,लिए सौम्य मुस्कान
माता सिद्धि-प्रदायिनी ,लिए सौम्य मुस्कान
Ravi Prakash
प्रेम को भला कौन समझ पाया है
प्रेम को भला कौन समझ पाया है
Mamta Singh Devaa
■ आज की बात...
■ आज की बात...
*Author प्रणय प्रभात*
यूं हर हर क़दम-ओ-निशां पे है ज़िल्लतें
यूं हर हर क़दम-ओ-निशां पे है ज़िल्लतें
Aish Sirmour
भाग्य - कर्म
भाग्य - कर्म
Buddha Prakash
* चलते रहो *
* चलते रहो *
surenderpal vaidya
अस्ताचलगामी सूर्य
अस्ताचलगामी सूर्य
Mohan Pandey
सितम तो ऐसा कि हम उसको छू नहीं सकते,
सितम तो ऐसा कि हम उसको छू नहीं सकते,
Vishal babu (vishu)
मैं खुद से कर सकूं इंसाफ
मैं खुद से कर सकूं इंसाफ
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
गवाह तिरंगा बोल रहा आसमान 🇮🇳
गवाह तिरंगा बोल रहा आसमान 🇮🇳
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
बेवजह ख़्वाहिशों की इत्तिला मे गुज़र जाएगी,
बेवजह ख़्वाहिशों की इत्तिला मे गुज़र जाएगी,
शेखर सिंह
2776. *पूर्णिका*
2776. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा
Raju Gajbhiye
जीवन वो कुरुक्षेत्र है,
जीवन वो कुरुक्षेत्र है,
sushil sarna
“ बधाई आ शुभकामना “
“ बधाई आ शुभकामना “
DrLakshman Jha Parimal
बसंत
बसंत
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
डोला कड़वा -
डोला कड़वा -
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
कजरी
कजरी
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
हंसते ज़ख्म
हंसते ज़ख्म
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
आस लगाए बैठे हैं कि कब उम्मीद का दामन भर जाए, कहने को दुनिया
आस लगाए बैठे हैं कि कब उम्मीद का दामन भर जाए, कहने को दुनिया
Shashi kala vyas
सुनो जीतू,
सुनो जीतू,
Jitendra kumar
श्रमिक
श्रमिक
Neelam Sharma
एक मुलाकात अजनबी से
एक मुलाकात अजनबी से
Mahender Singh
पड़े विनय को सीखना,
पड़े विनय को सीखना,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
तू छीनती है गरीब का निवाला, मैं जल जंगल जमीन का सच्चा रखवाला,
तू छीनती है गरीब का निवाला, मैं जल जंगल जमीन का सच्चा रखवाला,
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
1-अश्म पर यह तेरा नाम मैंने लिखा2- अश्म पर मेरा यह नाम तुमने लिखा (दो गीत) राधिका उवाच एवं कृष्ण उवाच
1-अश्म पर यह तेरा नाम मैंने लिखा2- अश्म पर मेरा यह नाम तुमने लिखा (दो गीत) राधिका उवाच एवं कृष्ण उवाच
Pt. Brajesh Kumar Nayak
मुद्दत से तेरे शहर में आना नहीं हुआ
मुद्दत से तेरे शहर में आना नहीं हुआ
Shweta Soni
बाबा केदारनाथ जी
बाबा केदारनाथ जी
Bodhisatva kastooriya
Loading...