Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Jul 2023 · 1 min read

फितरत

मुश्किल है पहचानना,
जिसे फितरत कहते हैं।

दुनिया यह वो है हुजूर,
जहाँ भेड़ की खाल में,
छुपकर भेड़िये रहते हैं।

और – जो गलती से,
पहचान ही गये इनको,
पहचान इनकी कायम,
न हरगिज रख पाओगे।

रंग-रूप भी बदल लेते,
हैं ये गिरगिट की तरह,
बार-बार धोखा खाओगे।

बात न होती है खत्म,
बस यह इतने ही पर,
साँप को दूध पिलाकर,
हर कदम डसे जाओगे।

अद्भुत है दुनिया यह,
किसे-किसे, कब-कब,
समझाओगे, मनाओगे?

दौर निकल पड़ा है,
दगा, चालबाजी का,
सँभाल लो खुद को,
बेमौत मारे जाओगे।

रचनाकार – कंचन खन्ना,
मुरादाबाद, (उ०प्र०, भारत)।
सर्वाधिकार, सुरक्षित (रचनाकार)।
दिनांक – ०१/०७/२०२३.

6 Likes · 2 Comments · 358 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Kanchan Khanna
View all
You may also like:
पावन सावन मास में
पावन सावन मास में
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
पैगाम
पैगाम
Shashi kala vyas
कितना अजीब ये किशोरावस्था
कितना अजीब ये किशोरावस्था
Pramila sultan
कभी हक़ किसी पर
कभी हक़ किसी पर
Dr fauzia Naseem shad
!! फूलों की व्यथा !!
!! फूलों की व्यथा !!
Chunnu Lal Gupta
मुहब्बत सचमें ही थी।
मुहब्बत सचमें ही थी।
Taj Mohammad
मौसम बेईमान है – प्रेम रस
मौसम बेईमान है – प्रेम रस
Amit Pathak
दीप ज्योति जलती है जग उजियारा करती है
दीप ज्योति जलती है जग उजियारा करती है
Umender kumar
Apne yeh toh suna hi hoga ki hame bado ki respect karni chah
Apne yeh toh suna hi hoga ki hame bado ki respect karni chah
Divija Hitkari
घूँघट (घनाक्षरी)
घूँघट (घनाक्षरी)
Ravi Prakash
प्रेम
प्रेम
Bodhisatva kastooriya
तेरे जाने के बाद ....
तेरे जाने के बाद ....
ओनिका सेतिया 'अनु '
हर इंसान होशियार और समझदार है
हर इंसान होशियार और समझदार है
पूर्वार्थ
गद्दार है वह जिसके दिल में
गद्दार है वह जिसके दिल में
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
माना नारी अंततः नारी ही होती है..... +रमेशराज
माना नारी अंततः नारी ही होती है..... +रमेशराज
कवि रमेशराज
आँखों में उसके बहते हुए धारे हैं,
आँखों में उसके बहते हुए धारे हैं,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
■ 2023/2024 👌
■ 2023/2024 👌
*Author प्रणय प्रभात*
नियम पुराना
नियम पुराना
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
पिरामिड -यथार्थ के रंग
पिरामिड -यथार्थ के रंग
sushil sarna
वो ही तो यहाँ बदनाम प्यार को करते हैं
वो ही तो यहाँ बदनाम प्यार को करते हैं
gurudeenverma198
बिछड़ कर तू भी जिंदा है
बिछड़ कर तू भी जिंदा है
डॉ. दीपक मेवाती
गौतम बुद्ध है बड़े महान
गौतम बुद्ध है बड़े महान
Buddha Prakash
दिनांक - २१/५/२०२३
दिनांक - २१/५/२०२३
संजीव शुक्ल 'सचिन'
मैं एक फरियाद लिए बैठा हूँ
मैं एक फरियाद लिए बैठा हूँ
Bhupendra Rawat
दिल ये इज़हार कहां करता है
दिल ये इज़हार कहां करता है
Surinder blackpen
माँ की दुआ
माँ की दुआ
Anil chobisa
2897.*पूर्णिका*
2897.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
यायावर
यायावर
Satish Srijan
*बीमारी न छुपाओ*
*बीमारी न छुपाओ*
Dushyant Kumar
माना के वो वहम था,
माना के वो वहम था,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
Loading...