Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Jan 2024 · 1 min read

नरसिंह अवतार

हिरणाकश्यप ने मृत्युंजय बनने के, सारे जतन जुटाए
घोर तपस्या के बल पर,ब़म्हा से वरदान बहुत ही पाए
न दिन में मरूं, न रात में,न घर में न बाहर
न मैं नीचे मरूं धरा पर,न ही मरूं मैं ऊपर
न हथियार चले कोई,न नर या कोई जानवर
सोच समझ कर मांग लिए वर,खुश हो गया अभय पाकर
डूब गया अपने ही दंभ में, धर्म का किया निरादर
खुद को कहने लगा ईश्वर, बढ़ाया पापाचार धरा पर
मृत्युंजय मान लिया खुद को,बन बैठा सर्बेश्वर
धर्म शील पुत्र प़हलाद हुए,भजन विष्णु का करते थे
पिता हुए नाराज, भगवान जो खुद को कहते थे
अटल भक्ति थी भक्त प़हलाद की,वे टस से मस न होते थे
जहर दिया पहाड़ से फेंका, अग्नि में उन्हें जलाया
नाना जतन जुटाए उसने, प़हलाद न मरने पाया
गुस्से में हिरणाकश्यप ने, प़हलाद को पास बुलाया
कहां है तेरा नारायण?, हिरणाकश्यप गुर्राया
प़हलाद ने कहा पिताजी, कहां नारायण नहीं है
बस्ते हैं प़भु कण कण में, कोई स्थान रिक्त नहीं है
क्या इस महल के खम्बे में,वसते तेरे नारायण हैं
हां इस खम्बे में भी, मुझको दिखते नारायण हैं
क़ोध में उसने उसी खम्बे से, प़हलाद को बांध दिया
काटूंगा तुझे और नारायण को, जोरदार प्रहार किया
प़कट हो गए नारायण,जिनने नरसिंह अवतार लिया
न नर थे न ही मानव,न ही दिन और रात
न ही अंदर बाहर मारा,न हथियार ही साथ
मार दिया था गोद में रखकर, नाखूनों का पाश
फ़ाड़ दिया नरसिंह भगवान ने, रखी भक्त की बात
सुरेश कुमार चतुर्वेदी

Language: Hindi
58 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from सुरेश कुमार चतुर्वेदी
View all
You may also like:
फीके फीके रंग हैं, फीकी फ़ाग फुहार।
फीके फीके रंग हैं, फीकी फ़ाग फुहार।
Suryakant Dwivedi
जमाने से सुनते आये
जमाने से सुनते आये
ruby kumari
करी लाडू
करी लाडू
Ranjeet kumar patre
कविता -दो जून
कविता -दो जून
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
■ तमाम लोग...
■ तमाम लोग...
*Author प्रणय प्रभात*
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रीतम श्रावस्तवी
अंदर से टूट कर भी
अंदर से टूट कर भी
Dr fauzia Naseem shad
माँ का आशीर्वाद पकयें
माँ का आशीर्वाद पकयें
Pratibha Pandey
तुझमें : मैं
तुझमें : मैं
Dr.Pratibha Prakash
*नौका में आता मजा, करिए मधुर-विहार(कुंडलिया)*
*नौका में आता मजा, करिए मधुर-विहार(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
तू जो कहती प्यार से मैं खुशी खुशी कर जाता
तू जो कहती प्यार से मैं खुशी खुशी कर जाता
Kumar lalit
बाग़ी
बाग़ी
Shekhar Chandra Mitra
मेहनत और अभ्यास
मेहनत और अभ्यास
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
मोदी क्या कर लेगा
मोदी क्या कर लेगा
Satish Srijan
मातर मड़ई भाई दूज
मातर मड़ई भाई दूज
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
3277.*पूर्णिका*
3277.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
‘पितृ देवो भव’ कि स्मृति में दो शब्द.............
‘पितृ देवो भव’ कि स्मृति में दो शब्द.............
Awadhesh Kumar Singh
तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो
तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो
gurudeenverma198
जीवन  के  हर  चरण  में,
जीवन के हर चरण में,
Sueta Dutt Chaudhary Fiji
सुविचार
सुविचार
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
दोस्ती ना कभी बदली है ..न बदलेगी ...बस यहाँ तो लोग ही बदल जा
दोस्ती ना कभी बदली है ..न बदलेगी ...बस यहाँ तो लोग ही बदल जा
DrLakshman Jha Parimal
ख्वाब सुलग रहें है... जल जाएंगे इक रोज
ख्वाब सुलग रहें है... जल जाएंगे इक रोज
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मन
मन
Happy sunshine Soni
"किसी की नज़र ना लगे"
Dr. Kishan tandon kranti
अमर स्वाधीनता सैनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
अमर स्वाधीनता सैनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
कवि रमेशराज
अपनी ही निगाहों में गुनहगार हो गई हूँ
अपनी ही निगाहों में गुनहगार हो गई हूँ
Trishika S Dhara
कामयाबी का जाम।
कामयाबी का जाम।
Rj Anand Prajapati
"फितरत"
Ekta chitrangini
इतनी महंगी हो गई है रिश्तो की चुंबक
इतनी महंगी हो गई है रिश्तो की चुंबक
कवि दीपक बवेजा
बस्ते...!
बस्ते...!
Neelam Sharma
Loading...