Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 May 2024 · 1 min read

चुप

चुप क्यों हो
पूछा उसने
भीतर
तूफ़ान सा
उठा,
धड़कने धौकनी
सी तेज़ हो गई
दिमाग़ में सन्नाटे
गूंजने लगे
आंखे नीर से
भर गई
होंठ कांपने लगे
पर मुंह से
बस एक शब्द
निकला
ठीक हूं।

Language: Hindi
1 Like · 36 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
ज़ख़्म गहरा है सब्र से काम लेना है,
ज़ख़्म गहरा है सब्र से काम लेना है,
Phool gufran
कौन सुने फरियाद
कौन सुने फरियाद
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
मेरे जीवन में सबसे
मेरे जीवन में सबसे
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
*यारा तुझमें रब दिखता है *
*यारा तुझमें रब दिखता है *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
2320.पूर्णिका
2320.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
रंजीत कुमार शुक्ल
रंजीत कुमार शुक्ल
Ranjeet kumar Shukla
हमेशा गिरगिट माहौल देखकर रंग बदलता है
हमेशा गिरगिट माहौल देखकर रंग बदलता है
शेखर सिंह
कुछ हकीकत कुछ फसाना और कुछ दुश्वारियां।
कुछ हकीकत कुछ फसाना और कुछ दुश्वारियां।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
"वोट के मायने"
Dr. Kishan tandon kranti
*वानर-सेना (बाल कविता)*
*वानर-सेना (बाल कविता)*
Ravi Prakash
ऐ ख़ुदा इस साल कुछ नया कर दें
ऐ ख़ुदा इस साल कुछ नया कर दें
Keshav kishor Kumar
मैं स्वयं को भूल गया हूं
मैं स्वयं को भूल गया हूं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मैं तो निकला था,
मैं तो निकला था,
Dr. Man Mohan Krishna
ख़त्म हुआ जो
ख़त्म हुआ जो
Dr fauzia Naseem shad
Quote
Quote
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कहने को बाकी क्या रह गया
कहने को बाकी क्या रह गया
Sandhya Chaturvedi(काव्यसंध्या)
आवाज मन की
आवाज मन की
Pratibha Pandey
मित्रता मे १० % प्रतिशत लेल नीलकंठ बनब आवश्यक ...सामंजस्यक
मित्रता मे १० % प्रतिशत लेल नीलकंठ बनब आवश्यक ...सामंजस्यक
DrLakshman Jha Parimal
स्वाभिमान
स्वाभिमान
Shweta Soni
।। समीक्षा ।।
।। समीक्षा ।।
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
आओ न! बचपन की छुट्टी मनाएं
आओ न! बचपन की छुट्टी मनाएं
डॉ० रोहित कौशिक
अब बदला किस किस से लू जनाब
अब बदला किस किस से लू जनाब
Umender kumar
किसी से दोस्ती ठोक–बजा कर किया करो, नहीं तो, यह बालू की भीत साबित
किसी से दोस्ती ठोक–बजा कर किया करो, नहीं तो, यह बालू की भीत साबित
Dr MusafiR BaithA
मूक संवेदना
मूक संवेदना
Buddha Prakash
💐श्री राम भजन💐
💐श्री राम भजन💐
Khaimsingh Saini
■ यूज़ कर सकते हैं, स्टोरेज़ नहीं। मज़ा लें पूरी तरह हर पल का।
■ यूज़ कर सकते हैं, स्टोरेज़ नहीं। मज़ा लें पूरी तरह हर पल का।
*प्रणय प्रभात*
रात बीती चांदनी भी अब विदाई ले रही है।
रात बीती चांदनी भी अब विदाई ले रही है।
surenderpal vaidya
चाँद से मुलाकात
चाँद से मुलाकात
Kanchan Khanna
डॉ. नगेन्द्र की दृष्टि में कविता
डॉ. नगेन्द्र की दृष्टि में कविता
कवि रमेशराज
पुरुषो को प्रेम के मायावी जाल में फसाकर , उनकी कमौतेजन्न बढ़
पुरुषो को प्रेम के मायावी जाल में फसाकर , उनकी कमौतेजन्न बढ़
पूर्वार्थ
Loading...