Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 Jul 2023 · 1 min read

गुरुवर तोरे‌ चरणों में,

गुरुवर तोरे‌ चरणों में,
नमन करूँ चित लाय।
जिनके स्मरण मात्र से,
अवगुण हिय न समाय।।

रचनाकार – कंचन खन्ना, मुरादाबाद।
सर्वाधिकार, सुरक्षित (रचनाकार)।
दिनांक – ०३/०७/२०२३.

370 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Kanchan Khanna
View all
You may also like:
Ghazal
Ghazal
shahab uddin shah kannauji
" उज़्र " ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
"भाभी की चूड़ियाँ"
Ekta chitrangini
रे ज़िन्दगी
रे ज़िन्दगी
Jitendra Chhonkar
चुपके से चले गये तुम
चुपके से चले गये तुम
Surinder blackpen
जब वक्त ने साथ छोड़ दिया...
जब वक्त ने साथ छोड़ दिया...
Ashish shukla
धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे भार्या गृहद्वारि जनः श्मशाने। देहश्
धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे भार्या गृहद्वारि जनः श्मशाने। देहश्
Satyaveer vaishnav
वनमाली
वनमाली
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
तुम रख न सकोगे मेरा तोहफा संभाल कर।
तुम रख न सकोगे मेरा तोहफा संभाल कर।
लक्ष्मी सिंह
Aksharjeet shayari..अपनी गलतीयों से बहुत कूछ सिखा हैं मैने ...
Aksharjeet shayari..अपनी गलतीयों से बहुत कूछ सिखा हैं मैने ...
AK Your Quote Shayari
* खूबसूरत इस धरा को *
* खूबसूरत इस धरा को *
surenderpal vaidya
-- आगे बढ़ना है न ?--
-- आगे बढ़ना है न ?--
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
चुनावी साल में
चुनावी साल में
*Author प्रणय प्रभात*
जय जय हिन्दी
जय जय हिन्दी
gurudeenverma198
प्रकाशित हो मिल गया, स्वाधीनता के घाम से
प्रकाशित हो मिल गया, स्वाधीनता के घाम से
Pt. Brajesh Kumar Nayak
"ऐसा मंजर होगा"
पंकज कुमार कर्ण
"आत्मकथा"
Rajesh vyas
जन्म गाथा
जन्म गाथा
विजय कुमार अग्रवाल
मैं चला बन एक राही
मैं चला बन एक राही
AMRESH KUMAR VERMA
दर्द की शर्त लगी है दर्द से, और रूह ने खुद को दफ़्न होता पाया है।
दर्द की शर्त लगी है दर्द से, और रूह ने खुद को दफ़्न होता पाया है।
Manisha Manjari
न किसी से कुछ कहूँ
न किसी से कुछ कहूँ
ruby kumari
शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ्य
शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ्य
Dr.Rashmi Mishra
Never forget
Never forget
Dhriti Mishra
संत एकनाथ महाराज
संत एकनाथ महाराज
Pravesh Shinde
कर
कर
Neelam Sharma
समकालीन हिंदी कविता का परिदृश्य
समकालीन हिंदी कविता का परिदृश्य
Dr. Pradeep Kumar Sharma
23/114.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/114.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
10-भुलाकर जात-मज़हब आओ हम इंसान बन जाएँ
10-भुलाकर जात-मज़हब आओ हम इंसान बन जाएँ
Ajay Kumar Vimal
मम्मी थी इसलिए मैं हूँ...!! मम्मी I Miss U😔
मम्मी थी इसलिए मैं हूँ...!! मम्मी I Miss U😔
Ravi Betulwala
लौट कर वक्त
लौट कर वक्त
Dr fauzia Naseem shad
Loading...