सिर्फ यही कहना है मुझको

सिर्फ यही कहना है मुझको,
मत समझ लेना दीवाना मुझको,
आवाज तुम मेरी यह सुनकर,
कहानी मेरी धड़कन की पढ़कर,
अहसास मुझको भी यही होता है,
तेरा इस प्रकार मेरी जेब में हाथ डालना,
मेरे सँवरे बालों को इस प्रकार बिगाड़ना,
मेरे हर सवाल का जवाब बेफिक्री से देना,
कभी तेरा रूठना मेरी बातों पर,
कभी तेरा हँसना खिलखिलाकर,
कभी पलों तक टकटकी लगाकर,
तेरा मुझको घूरते रहना,
कि मैं हंस दूं ,
मेरी हंसी का इंतजार करना,
उकसाना मुझको कि मैं तुमको छेड़ूँ ,
बताऊँ और क्या तुमको।
सिर्फ यही कहना है मुझको,
कभी इस तरह गीत गाना तेरा,
जूली-जूली, कांटा लगा,
कभी मैंने पीटा तुमको,
तो कभी तुमने पीटा मुझको,
अति तक भी पहुंच गए हम,
लेकिन क्या जुदा हो सके हम,
तुम मुझको देखकर इठलाती हो,
अपनी जुल्फों को मादकता से,
तुम झटकाती हो,
और देखती हो मुझको इस तरह,
कि जैसे तुमको मेरी बहुत जरूरत है,
तू भी चाहती है मुझको,
जैसे कि मैं चाहता हूँ तुमको।
सिर्फ यही कहना है मुझको———————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)