श्याम को ढूँढने राधा सखियों सहित-श्याम भजन

श्याम को ढूँढने राधा सखियों सहित-श्याम भजन
श्याम को ढूँढने, कान्हा को ढूँढने
राधा सखियों सहित, बाग में चल पड़ी
खग-विहग से वहाँ, पूछने वो लगी
देखा क्या श्याम को, पीछे उनके पड़ी
मोर ने ये कहा, पंख मेरा लिया
पंखों को खोलकर, पीहू-पीहू किया
नाचने वो लगा, घूमने वो लगा
छोड़ने वो लगा, पंखुड़ी की छड़ी
श्याम को ढूँढने, कान्हा को ढूँढने
राधा सखियों सहित,बाग में चल पड़ी
बात सुन के गौ माता ने, उनसे कहा
दुग्ध की हांडी देखो, जो रखी वहाँ
ग्वालों संग दूध मेरा, कान्हा ने पिया
बंसी सुन के ही कान्हा की, मैं हूँ खड़ी
श्याम को ढूँढने, कान्हा को ढूँढने
राधा सखियों सहित, बाग में चल पड़ी
एक तरु के तले, कान्हा बैठा मिला
देख के उसको राधा का, चेहरा खिला
गोपियाँ भी खुशी से, लगी झूमनें
देखने को वो गोविंद, घड़ी दो घड़ी
श्याम को ढूँढने, कान्हा को ढूँढने
राधा सखियों सहित, बाग में चल पड़ी
©अरविंद भारद्वाज