“शब्दों में खुशबू”

शब्दों की गरिमा होती है अद्भुत,
जो व्यक्तित्व की पहचान कराए।
जो उतम शब्दों को कसे कसौटी पे,
वहीं जीवन भर शब्दों की खुशबू से नहाए।।
जो ना करे शब्दों का प्रयोग परिपक्वता से,
वह सारी उम्र उपहास का पात्र बन कर रह जाए।
जो तोल मोल कर शब्दों को मुंह से निकले,
वहीं हमेशा मान सम्मान का जीवन भर लाभ उठाए।।
शब्द सहलाएं शब्द हमें रुलाए,
शब्द कभी मरहम का काम भी कर जाए।
रह-रह कर शब्द कभी हृदय में हूक उठाए,
तो कभी सीधे हृदय पर तीर सा वार कर जाए।।
अपरंपार महिमा हैं शब्दों की,
कभी रिश्तो में चिकनाहट तो कभी रूखापन ले आए।
जब शब्द मिश्री के घोल से निकले होठों से,
तब घर आंगन खुशियों के राग से भर जाए।।
कभी चीखते चिल्लाते कभी हलक जगाए,
कभी मौन रहकर शब्दों का युद्ध मचाए।
बात-बात पर करें सवाल हजारों,
तो कभी चुप्पी साधे दर्द का आलम बढ़ाएं। ।
मधु गुप्ता “अपराजिता”