“प्यारी संगिनी, मान जाओ न”
ग़ुस्सा छोड़ो, मुस्काओ ना,
दिल की बातें बतलाओ ना।
तुम जो रूठी, सूना आंगन,
खुशियों के दीप जलाओ ना।
तेरी हँसी है सुबह की किरण,
तेरे बिना ये जग है विरान।
मेरी गलती जो भी हो, सुन लो,
अब मत रहो यूँ अनजान।
तेरे बिना अधूरा जीवन,
तेरे साथ ही हर पल रोशन।
रूठने में भी है प्यार छिपा,
पर मान भी जाओ, ओ साजन।
ले आऊँ चाँद, सितारे तोड़,
या लिख दूँ तेरा नाम आसमान।
बस इतनी गुज़ारिश है मेरी,
एक बार दे दो अपनी मुस्कान।
अब मान भी जाओ, हंस दो ना,
इस पागल का दिल रख लो ना।
तुम बिन अधूरा हर सपना,
अब अपना प्यार जताओ ना।