कदम बढ़ाओ साथ खड़े हैं,कहने वाले मुंह फेरे खड़े हैं।

कदम बढ़ाओ साथ खड़े हैं,कहने वाले मुंह फेरे खड़े हैं।
गली मोहल्ले सूने पड़े हैं, दोस्त पुराने दुश्मनों से जा मिले हैं।।
होली के रंग अब ना लगे रहे खरे हैं।
उनमें भी कुछ, बदरंग मिलाबटी केमिकल मिले हैं
मधु गुप्ता “अपराजिता”