साथ तेरा चाहता हूं ।
साथ तेरा चाहता हूं।
डूबती संध्या का तारा देखे हमको मुस्कुराए, लौटता पंछी हमारी ओर देखे गुनगुनाए चित्र जाने कितने ऐसे कल्पना में बांधता हूं।
साथ तेरा चाहता हूं।
दूर धुंधलाए क्षितिज पर देखता हूंतू खड़ी है,
और तुम तक पहुंचने को बस बची आधी घड़ी है,
मैं समय से जीत पाऊं तेज इतना भागता हूं।
साथ तेरा चाहता हूं।
मन की दुनियां ही कठिन है कौन इससे जीत पाता, तेरी बातें तू ही जाने मै न इससे पार पाता,
व्यर्थ है उनसे उलझना बात इतनी जानता हूं।
कुमार कलहंस।