*मुंडी लिपि के अनोखे बहीखाते*

मुंडी लिपि के अनोखे बहीखाते
जिन बहीखातों पर मुंडी लिपि में व्यापारिक कार्य होता है, वह साधारण रजिस्टर नहीं होते। यह खुले पन्ने होते हैं, जिन पर ऊपर की तरफ केवल तीन छेद सुई से करके डोर से गॉंठ बॉंध दी जाती है। डोर मजबूत होती है तथा गॉंठ भी ऐसी कि एक बार लग गई तो कभी नहीं खुलती।
दो सौ-ढाई सौ प्रष्ठों के यह बहीखाते लगभग नौ इंच चौड़े तथा ढाई फीट लंबाई के होते हैं। सुविधाजनक रीति से इन्हें खोलने और बंद करने के लिए एक मोड़(फोल्ड) दे दिया जाता है। हिसाब-किताब देखने के लिए पूरा बहीखाता ढाई फीट लंबाई में खोला जाता है तथा हिसाब देखने के बाद बहीखाता बंद कर दिया जाता है। बंद बहीखाते की लंबाई इस तरह सवा फिट रह जाती है।
बहीखाते का कागज मोटा और चिकना होता है। कागज के ऊपर सुरक्षा के लिए गत्ते (पठ्ठे) का एक कवर रहता है। गत्ते के कवर के ऊपर एक पतला कपड़ा पतली डोरी से सिला हुआ होता है। कपड़ा अनिवार्य रूप से लाल रंग का होता है। सभी बहीखातों पर प्रथम पृष्ठ पर लक्ष्मी जी और गणेश जी का चित्र सुशोभित रहता है। पठ्ठे का कवर मुलायम होता है ताकि उसे सरलता से मोड़ा जा सके। बहीखाता दिन भर में अनेक बार खोला और बंद किया जाता है लेकिन मजाल क्या कि बहीखातों की सिलाई कभी भी कमजोर पड़ी हो ! कागज, कवर और सिलाई तीनों की क्वालिटी इतनी उम्दा होती है कि यह बहीखाते सरलता पूर्वक सौ वर्ष तक सहेज कर रखे जा सकते हैं। सैकड़ो वर्षों से जिल्द के स्थान पर मात्र डोरी की सिलाई से बनने वाले यह बहीखाते व्यापार जगत में प्रयोग में आते रहे हैं। इनमें किसी प्रकार का गोंद आदि चिपकाने वाले पदार्थ का उपयोग प्रष्ठों को जोड़ने के लिए नहीं किया जाता। सारे प्रष्ठ आपस में केवल एक डोरी से जुड़े हुए होते हैं।
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लेखक: रवि प्रकाश, बाजार सर्राफा, रामपुर