– मोहब्बत के दरवाजे सदा खुले मिले –
– मोहब्बत के दरवाजे सदा खुले मिले –
कदर नही कि मैंने उसकी कभी पर,
उसके दिल में सदा हम मिले,
अपनो के लिए ठुकराया था उसे पर,
ठुकराने का कभी न ग़म न किया,
प्यार व्यार सब झूठा होता है,
बेगाना जाना था उसे हमने,
अपनो ने जब बता दी एन वक्त पर अपनी औकात,
तब याद आई अचानक उसकी वो बात,
में तुम्हारे लिए अपनो से लड़ सकती हु,
फिर तुम्हें मुझे अपनाने से क्यों है एतराज,
मिलकर रहेंगे एक साथ जैसे चाय में शक्कर मिल जाए,
मीठा होगा हमारा जीवन और होगी नई शुरुआत,
अपनो के लिए तुम्हे ठुकराया पर,
अब अपनो ने दिखा दी अपनी औकात,
एक बात तो है गहलोत तुझमें ,
भरत का दिल है साफ ,
जिसने भी की तुझसे मोहब्बत तेरे क्या नसीब निकले,
तुझे मोहब्बत करने वाले के तेरे लिए मोहब्बत के दरवाजे सदा खुले मिले
✍️ भरत गहलोत
जालोर राजस्थान