*यह कुंभ देश की धड़कन है, जाग्रत भारत स्वीकारो अब (राधेश्याम

यह कुंभ देश की धड़कन है, जाग्रत भारत स्वीकारो अब (राधेश्यामी छंद)
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1)
यह कुंभ देश की धड़कन है, जाग्रत भारत स्वीकारो अब
भारत माता की जय बोलो, सब शत-शत बार पुकारो अब
2)
तन को संस्पर्श करो अमृत, डुबकी प्रयाग की लगवाओ
जो घाट मिले जिस जगह जिसे, मन में प्रयाग भर ले आओ
3)
तब पुण्य मिलेगा तुमको यह, भारत का ध्वज फहराने का
तन-मन निर्मल हो जाएगा, यह फल है कुंभ नहाने का
4)
यह युगों पुराना भारत है, यह युगों पुरानी गाथा है
अमृत भारत की नदियों में, ऊॅंचा इस से ही माथा है
5)
श्रद्धा-विश्वास रखो मन में, अनुशासन में रहना सीखो
यह अपना पर्व सनातन है, मन महाकुंभमय ही दीखो
6)
दुनिया का सबसे बड़ा पर्व, नदियों के तट पर आता है
भक्तों का मेला जुड़ा यहॉं, डुबकी हर भक्त लगाता है
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451