नयन सींचते प्रेम को,
नयन सींचते प्रेम को,
नयन ही हैं घनसार।
वृष्टि करें आनन्द की,
नयन प्रीत के द्वार।।
✍️डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार शर्मा,इंदौर
नयन सींचते प्रेम को,
नयन ही हैं घनसार।
वृष्टि करें आनन्द की,
नयन प्रीत के द्वार।।
✍️डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार शर्मा,इंदौर