अपनापन

अपनापन
——-–—
स्वप्न सँवरने लगते हैं
मिलता है जब अपनापन।
आँसू गालों पर हँसते हैं,
मिलता है जब अपनापन..!
✍️डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार शर्मा, इंदौर
अपनापन
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स्वप्न सँवरने लगते हैं
मिलता है जब अपनापन।
आँसू गालों पर हँसते हैं,
मिलता है जब अपनापन..!
✍️डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार शर्मा, इंदौर