दोहा पंचक. . . . मौसम आया प्यार का
दोहा पंचक. . . . मौसम आया प्यार का
मौसम आया प्यार का, दुर्लभ हुए गुलाब ।
चाकलेट से अब कहाँ , माने भला शबाब ।।
मौसम आया प्यार का, चले नैन संवाद ।
छुप-छुप देखो हो रहे, मोहक प्रेम प्रलाप ।।
मौसम आया प्यार का, आशिक ढूँढें मीत ।
ले हाथों में हाथ फिर, लगे निभाने रीत ।
मौसम आया प्यार का, प्रेम हुआ स्वच्छंद ।
बेसुध दिल करने लगा, यौवन का मकरंद ।।
मौसम आया प्यार का, चला प्यार का दौर ।
मुक्त प्रेम परिणाम पर, करे न कोई गौर ।।
सुशील सरना / 10-2-25