काश फिर मिलेंगे

काश फिर मिलेंगे
मिलेंगे फिर कभी,
उसी गली की उस चौखट पे
जहाँ एक ही राह में दो रास्ते होगें
किताब और प्रेम के रास्ते
~जितेन्द्र कुमार “सरकार”
काश फिर मिलेंगे
मिलेंगे फिर कभी,
उसी गली की उस चौखट पे
जहाँ एक ही राह में दो रास्ते होगें
किताब और प्रेम के रास्ते
~जितेन्द्र कुमार “सरकार”