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31 Dec 2024 · 1 min read

कभी ज़माने ने नए ख़ून का मिजाज़ वतन में देखा था

कभी ज़माने ने नए ख़ून का मिजाज़ वतन में देखा था
उतरने लगा वफ़ा का लेपन मतलब परस्ती का खिज़ाब ख़िज़ा में ज़माने ने देखा था
वो दौर था ही अलग .. नस्ल का,
उस रुआब का असर अपन ने देखा था
बदलना है मिजाज़ क़ैफ़ियत इस दौर का ,
निगाहों ने सपन ये आज देखा था

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