असली काम तो वह है जो आप खुद पर करते हैं।
*परिवर्तन में छिपा हुआ है, सुख के रहस्य का शुभ झरना (राधेश्य
महिमां मरूधर री
जितेन्द्र गहलोत धुम्बड़िया
झोपड़ियों से बांस खींचकर कैसे मैं झंडा लहराऊँ??
सिपाही
डॉ राजेंद्र सिंह स्वच्छंद
मुझे किताबों की तरह की तरह पढ़ा जाए
आनंद से जियो और आनंद से जीने दो.
हिंदी की उपेक्षा, मानसिक गुलामी
एक पौधा तो अपना भी उगाना चाहिए
- तेरे सिवा अब कौन है हमारा -
*परिमल पंचपदी--- नवीन विधा*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)
“मेरी किताब “पुष्प -सार” और मेरी दो बातें”
ज़िन्दगी तेरी बनना जायें कहीं,
बिन चाहें तेरे गले का हार क्यों बनना