Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 May 2024 · 1 min read

हिलमिल

हिलमिल

मेरा रंग
चाय में दूध कम
मेरी आँखें
गोधूली में सब घर को भागे
मेरी नाक
अरावली का पहाड़
मेरी मुस्कान
शांत समुंदर में आया तूफ़ान
मेरा मैं
तेरा तू
मिले कभी तो
ढूँढे सुकून
प्राकट्य कुछ नहीं
अदृश्य में छुपा अदभुत रहस्य है कहीं
दूर क्षितिज की गहरी लालिमा
नीलगगन के गहरे रंग
इन्द्रधनुषी सा आभास
लिए है मेरे हिय को थाम
शांत मनोरम
सब ठहरा सा
कुछ मद्धम, कुछ भीगा सा
कानो में घुले कुछ रस मीठा सा
आधा बचपन कुछ बीता सा
मधुरम सी वो तान सुरीली
वो लहकी वो बहकी सी
वो गुड़िया जापानी थी
एक राजा एक रानी थी
बड़ा सरल था जीवन अपना
कुछ अपना कुछ सपना सा ।।

डॉ अर्चना मिश्रा

Language: Hindi
1 Like · 85 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

गर्मी की मार
गर्मी की मार
Dr.Pratibha Prakash
#शीर्षक-प्यार का शक्ल
#शीर्षक-प्यार का शक्ल
Pratibha Pandey
3730.💐 *पूर्णिका* 💐
3730.💐 *पूर्णिका* 💐
Dr.Khedu Bharti
डरावनी गुड़िया
डरावनी गुड़िया
Neerja Sharma
रिपोस्ट....
रिपोस्ट....
sheema anmol
कुछ तो कहना होगा
कुछ तो कहना होगा
राकेश पाठक कठारा
कभी ख़ुशी कभी ग़म
कभी ख़ुशी कभी ग़म
Dr. Rajeev Jain
दिल से हमको
दिल से हमको
Dr fauzia Naseem shad
दुनिया में हज़ारों हैं , इन्सान फ़रिश्तों  से  ,
दुनिया में हज़ारों हैं , इन्सान फ़रिश्तों से ,
Neelofar Khan
यह क्या अजीब ही घोटाला है,
यह क्या अजीब ही घोटाला है,
Chaahat
भारत माता अभिनंदन दिवस
भारत माता अभिनंदन दिवस
Sudhir srivastava
होली
होली
Phoolchandra Rajak
नव वर्ष क्यू मनाते हो
नव वर्ष क्यू मनाते हो
Satyaveer vaishnav
कब मेरे मालिक आएंगे।
कब मेरे मालिक आएंगे।
Kuldeep mishra (KD)
बदले मौसम
बदले मौसम
Chitra Bisht
कुछ अनकही
कुछ अनकही
Namita Gupta
और क्या कहूँ तुमसे मैं
और क्या कहूँ तुमसे मैं
gurudeenverma198
तो गलत कहाँ हूँ मैं ?
तो गलत कहाँ हूँ मैं ?
नेहा आज़ाद
एक उम्र के बाद आस, अपेक्षा, चिंता, दायित्व जैसी गठरियाँ सिर
एक उम्र के बाद आस, अपेक्षा, चिंता, दायित्व जैसी गठरियाँ सिर
*प्रणय प्रभात*
ए दिल्ली शहर तेरी फिजा होती है क्यूँ
ए दिल्ली शहर तेरी फिजा होती है क्यूँ
shabina. Naaz
महाकुंभ
महाकुंभ
Dr. Sunita Singh
विवेकानंद
विवेकानंद
शालिनी राय 'डिम्पल'✍️
हिन्दीग़ज़ल में कितनी ग़ज़ल? -रमेशराज
हिन्दीग़ज़ल में कितनी ग़ज़ल? -रमेशराज
कवि रमेशराज
बच्चों का मेला
बच्चों का मेला
अरशद रसूल बदायूंनी
श्रंगार
श्रंगार
ललकार भारद्वाज
“किरदार भले ही हो तकलीफशुदा  ,
“किरदार भले ही हो तकलीफशुदा ,
Neeraj kumar Soni
सदियों बाद पधारे हैं प्रभु, जन्मभूमि हर्षाई है (हिंदी गजल)
सदियों बाद पधारे हैं प्रभु, जन्मभूमि हर्षाई है (हिंदी गजल)
Ravi Prakash
संघर्ष पथ का मैं दीपक
संघर्ष पथ का मैं दीपक
पं अंजू पांडेय अश्रु
जन्में भारत भूमि पर, नारी से भगवान।
जन्में भारत भूमि पर, नारी से भगवान।
संजय निराला
यहां सभी लोग समय के चक्र में बंधे हुए है, जब सूर्य दिन के अल
यहां सभी लोग समय के चक्र में बंधे हुए है, जब सूर्य दिन के अल
Rj Anand Prajapati
Loading...