Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 May 2024 · 1 min read

कसौटी जिंदगी की

ध्वस्त हुए जीवन प्रतिमान
लगी किनारे बंदगी,
आता नही समझ मुझको
कैसी है कसौटी जिंदगी।

पूरित जीवन के जैसे
हो अभीष्ट सारे प्रतिफल,
संगीत समाहित जीवन में
जैसे नदियों की कल-कल।

लगता पाया हुआ बहुत
फिर क्या शेष बचा रखा है
जीना किसलिए और है क्यो
बचा और उद्देश्य है क्या ?

बचपन का उद्देश्य सभी
युवपन ने जैसे छीन लिया
जब तक चेता था निज धर्म
पूरी युवपन ही बीत गया।

अर्थहीन बन गया बुढापा
रहा नियति के था अधीन,
जीवन रेत से निकल गया
मिटा न चाह लिये आमीन।

एक चाह नहि पूरी होय
दूजी खड़ी सामने होय,
आज समझ आया है मुझको
कभी नही यह पूरी होय।

संजोया अतीत को मैंने था
बहुत दिनों तक जीवन मे,
ऊब एक दिन फेक दिया
था नवीन आस ले मधुबन में।

दुविधा में निर्मेष सदा
अग्नि समाहित उपवन है,
ले दे कर किसी तरह
बीत रहा यह जीवन है।

1 Like · 145 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
View all

You may also like these posts

मेरी काली रातो का जरा नाश तो होने दो
मेरी काली रातो का जरा नाश तो होने दो
Parvat Singh Rajput
पत्रकारिता सामाजिक दर्पण
पत्रकारिता सामाजिक दर्पण
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
पेड़ लगाओ
पेड़ लगाओ
Usha Gupta
तितली भी मैं
तितली भी मैं
Saraswati Bajpai
वर्ण
वर्ण
संजय निराला
सीसीटीवी छान छान कर
सीसीटीवी छान छान कर
Dhirendra Singh
यहाॅं हर इंसान मतलबी है,
यहाॅं हर इंसान मतलबी है,
Ajit Kumar "Karn"
प्रेम
प्रेम
Pushpa Tiwari
कुछ बात
कुछ बात
ललकार भारद्वाज
“विश्वास”
“विश्वास”
Neeraj kumar Soni
Yearndoll
Yearndoll
shop nkdoll
सच्चाई की डगर*
सच्चाई की डगर*
Rambali Mishra
तुमको भूला कभी नहीं कहते
तुमको भूला कभी नहीं कहते
Dr fauzia Naseem shad
*अभी और कभी*
*अभी और कभी*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
उसका प्रेम
उसका प्रेम
डॉ राजेंद्र सिंह स्वच्छंद
घर घर ऐसे दीप जले
घर घर ऐसे दीप जले
gurudeenverma198
संसार का स्वरूप (2)
संसार का स्वरूप (2)
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी "
"बताया नहीं"
Dr. Kishan tandon kranti
वो चुपचाप आए और एक बार फिर खेला कर गए !
वो चुपचाप आए और एक बार फिर खेला कर गए !
सुशील कुमार 'नवीन'
ज़िंदगी में सब कुछ करना, मग़र अपने दिमाग़ को
ज़िंदगी में सब कुछ करना, मग़र अपने दिमाग़ को
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
फीकी फीकी है हरियाली
फीकी फीकी है हरियाली
Dr Archana Gupta
राम आए हैं भाई रे
राम आए हैं भाई रे
Harinarayan Tanha
दर्शन तो कीजिए
दर्शन तो कीजिए
Rajesh Kumar Kaurav
तू ठहर चांद हम आते हैं
तू ठहर चांद हम आते हैं
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
नश्वर तन को मानता,
नश्वर तन को मानता,
sushil sarna
मत केश सँवारो
मत केश सँवारो
Shweta Soni
'निशात' बाग का सेव (लघुकथा)
'निशात' बाग का सेव (लघुकथा)
Indu Singh
मेरी हथेली पर, तुम्हारी उंगलियों के दस्तख़त
मेरी हथेली पर, तुम्हारी उंगलियों के दस्तख़त
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
जगत कंटक बिच भी अपनी वाह है |
जगत कंटक बिच भी अपनी वाह है |
Pt. Brajesh Kumar Nayak / पं बृजेश कुमार नायक
*प्यासी धरती को मिला, वर्षा का उपहार (कुंडलिया)*
*प्यासी धरती को मिला, वर्षा का उपहार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
Loading...