लिखता हूं खत हर रोज तेरे अफसाने पर।
मौसम ए बहार क्या आया ,सभी गुल सामने आने लगे हैं,
रतन महान , एक श्रद्धांजलि
उसके कहने पे दावा लिया करता था
मैं अपने सारे फ्रेंड्स सर्कल से कहना चाहूँगी...,
प्रेम कई रास्तों से आ सकता था ,
Your brain won't let you live in peace. It will keep remindi
अँधेरों रूबरू मिलना, तुम्हें किस्सा सुनाना है ,
ज़िंदगी और मौत के बीच का फ़ासला,रफ़्ता रफ़्ता घट रहा।