Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
0
Notifications
Settings
Dr. Kishan tandon kranti
294 Followers
Follow
Report this post
9 Apr 2024 · 1 min read
“सहारा”
“सहारा”
डूबते के लिए बहुत है
तिनके का सहारा
गम की बदली छाए तो
सूरज सा दीदार दे।
Tag:
Quote Writer
Like
Share
4 Likes
·
3 Comments
· 107 Views
Share
Facebook
Twitter
WhatsApp
Copy link to share
Copy
Link copied!
Books from Dr. Kishan tandon kranti
View all
पूनम का चाँद (कहानी-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
तस्वीर बदल रही है (काव्य-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
नवा रद्दा (कविता-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
तइहा ल बइहा लेगे (कविता-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
परछाई के रंग (काव्य-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
सबक (लघुकथा-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
सौदा (कहानी-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
जमीं के सितारे (कहानी-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
बेहतर दुनिया के लिए (काव्य-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
मेला (कहानी-संग्रह)
Kishan Tandon Kranti
You may also like these posts
सपना ....
sushil sarna
वो दिन दूर नहीं जब दिवारों पर लिखा होगा...
Ranjeet kumar patre
कागज की कश्ती
Ritu Asooja
अकेलेपन का अंधेरा
SATPAL CHAUHAN
पहाड़ों मा पलायन
Durgesh Bhatt
कुछ अपनी कुछ उनकी बातें।
सत्य कुमार प्रेमी
"इशारे" कविता
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
*1977 में दो बार दिल्ली की राजनीतिक यात्राएँ: सुनहरी यादें*
Ravi Prakash
🙏 * गुरु चरणों की धूल*🙏
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
बाबा रामदेव जी
जितेन्द्र गहलोत धुम्बड़िया
इश्क तो कर लिया कर न पाया अटल
अटल मुरादाबादी(ओज व व्यंग्य )
#ग़ज़ल
*प्रणय*
ये दिलकश नज़ारा बदल न जाए कहीं
Jyoti Roshni
मन वैरागी हो जाता है
Shweta Soni
चेहरे की शिकन देख कर लग रहा है तुम्हारी,,,
शेखर सिंह
न तो कोई अपने मौत को दासी बना सकता है और न ही आत्मा को, जीवन
Rj Anand Prajapati
*पितृ-दिवस*
Pallavi Mishra
गृहणी
Sonam Puneet Dubey
अफ़सोस
Dipak Kumar "Girja"
4154.💐 *पूर्णिका* 💐
Dr.Khedu Bharti
पर्यावरण
Rambali Mishra
तेरे नाम लिखूँ
Dr. Kishan tandon kranti
वो मुझे रूठने नही देती।
Rajendra Kushwaha
चाय
Ruchika Rai
संस्कार
Sanjay ' शून्य'
संदेश
Shyam Sundar Subramanian
"नींद की तलाश"
Pushpraj Anant
जयंती विशेष : अंबेडकर जयंती
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
हम जिस दौर में जी रहे हैं उसमें बिछड़ते वक़्त
पूर्वार्थ
इन दरकती रेत की दीवारों से,
श्याम सांवरा
Loading...