आप जब तक दुःख के साथ भस्मीभूत नहीं हो जाते,तब तक आपके जीवन क
आज की सौगात जो बख्शी प्रभु ने है तुझे
गंगा- सेवा के दस दिन (नौंवां दिन)
यदि भविष्य की चिंता है तो वर्तमान को सुधार लो
तुम्हारे पथ के कांटे मैं पलकों से उठा लूंगा,
वक्त बताता है कि कैसा कौन है और क्या है
व्यवहार वह सीढ़ी है जिससे आप मन में भी उतर सकते हैं और मन से
चोट खाकर टूट जाने की फितरत नहीं मेरी
कोई भी व्यक्ति जिस भाषा,समुदाय और लोगो के बीच रहता है उसका उ
नित्य अमियरस पान करता हूँ।
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)