Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Mar 2024 · 1 min read

“शायरा सँग होली”-हास्य रचना

एक शायरा, आ गईं, ले हाथों मेँ, रँग,
बेल-बाटम पहने, मगर, कुर्ता था कुछ तँग।।

जोगी जी भी क्या करें, चढ़ी हुई थी भँग।
भले उम्र थी हो चली, पर दिल से थे यँग।।

ना तो कविता सूझती न ही बना कुछ व्यँग,
उर मेँ पर बजने लगे, वीणा, झाँझ, मृदंग।।

घरवाली ने देख जो, लिया शायरा सँग,
भरी बाल्टी झोँक दी, रह गए हम भी दँग।।

पल भर मेँ ग़ायब हुई, “आशा” भरी तरँग,
अब टालें भी किस तरह, होने वाली जँग।।

मित्र मँडली, आ गई, हुआ ख़ूब हुड़दंग,
गुझिया, पापड़ सँग हुआ, पर था अन्त प्रसँग..!

Language: Hindi
5 Likes · 5 Comments · 161 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
View all

You may also like these posts

दर्द.
दर्द.
Heera S
तेरी इबादत करूँ, कि शिकायत करूँ
तेरी इबादत करूँ, कि शिकायत करूँ
VINOD CHAUHAN
आश्रम
आश्रम
इंजी. संजय श्रीवास्तव
जिसे मौत भी डरा न सकी
जिसे मौत भी डरा न सकी
नेताम आर सी
मैं कभी भी भीड़ के साथ नही खड़ा होना चाहता हूं।
मैं कभी भी भीड़ के साथ नही खड़ा होना चाहता हूं।
Rj Anand Prajapati
Who am I?
Who am I?
R. H. SRIDEVI
हिन्दी
हिन्दी
आशा शैली
कुछ लिखूँ.....!!!
कुछ लिखूँ.....!!!
Kanchan Khanna
लेख
लेख
Praveen Sain
पितर पक्ष
पितर पक्ष
Ranjeet kumar patre
हर दिल में प्यार है
हर दिल में प्यार है
Surinder blackpen
sp85 रणचंडी की प्रतिमूर्ति रानी लक्ष्मी बाई
sp85 रणचंडी की प्रतिमूर्ति रानी लक्ष्मी बाई
Manoj Shrivastava
किस दिल की दीवार पे…
किस दिल की दीवार पे…
sushil sarna
घर वापसी
घर वापसी
Aman Sinha
मजबूरी
मजबूरी
The_dk_poetry
हल कोई
हल कोई
Dr fauzia Naseem shad
रियायत कौन देता है दूकानदारी में,तंग हाथ रखे जाते हैं खरीददा
रियायत कौन देता है दूकानदारी में,तंग हाथ रखे जाते हैं खरीददा
पूर्वार्थ
बापू गाँधी
बापू गाँधी
Kavita Chouhan
एक मीठा सा
एक मीठा सा
हिमांशु Kulshrestha
4661.*पूर्णिका*
4661.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आँसू
आँसू
शशि कांत श्रीवास्तव
तुम कहते हो राम काल्पनिक है
तुम कहते हो राम काल्पनिक है
Harinarayan Tanha
जिस यात्रा का चुनाव
जिस यात्रा का चुनाव
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
जब भी किसी कार्य को पूर्ण समर्पण के साथ करने के बाद भी असफलत
जब भी किसी कार्य को पूर्ण समर्पण के साथ करने के बाद भी असफलत
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
नववर्ष का आगाज़
नववर्ष का आगाज़
Vandna Thakur
हे दामन में दाग जिनके
हे दामन में दाग जिनके
Swami Ganganiya
अच्छे लड़के.. समाज की नजर में, कैसे होते है? किसी ने मुझसे प
अच्छे लड़के.. समाज की नजर में, कैसे होते है? किसी ने मुझसे प
पूर्वार्थ देव
असहाय वेदना
असहाय वेदना
Shashi Mahajan
ज़िंदगी में हर मोड़ मुहब्बत ही मुहब्बत है,
ज़िंदगी में हर मोड़ मुहब्बत ही मुहब्बत है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
#मंगलकामनाएं-
#मंगलकामनाएं-
*प्रणय प्रभात*
Loading...