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1 Jan 2024 · 1 min read

23/218. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*

23/218. छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
🌷 तोर कठ्ठल कठ्ठल के हांसी🌷
2122 22 22
तोर कठ्ठल कठ्ठल के हांसी ।
मोर बर हो जाथे फांसी।।
तै खुसी के फूल खिलाबे।
राखबे झन संग उदासी ।।
कोन संगी बनही जग मा।
गुनत हो जाथे रोवासी ।।
ये मया पीरित के बंधना।
देख बनथे दुनिया दासी ।।
देख के समझ इहां खेदू।
मन हमर हे मथुरा कांसी।।
………….✍ डॉ .खेदू भारती”सत्येश”
01-01-2024सोमवार

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