Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 May 2024 · 1 min read

21– 🌸 और वह? 🌸

21– 🌸 और वह ? 🌸
——====——
कोई कहता उसे आम आदमी
कोई कहता सडक का आदमी
और कोई तो मज़लूम भी
जो हो हैं सब मजबूर ही ।
ना शक्ति रही है उनमें इतनी
ना बहुत ज़ोर है बाज़ूओं में
ना जेबें भरी हैं उसकी सिक्कों से
बस मन रहता है हमेशा भारी —
मेहनत है सिर्फ उसकी जमा पूंजी
बँगले का नहीं देखता कभी सपना
एक छत एक छाँव का बने घोंसला
हाथ -पैरों पर रखता है भरोसा
दो जून रोटी मिले यही आशा ,
आँखें मीँचे चलता जाता ,
न कभी देखे आगा पीछा,
बहुत सरल जीवन है इसका
छल-प्रपंच से रहता दूर हमेशा
क्या सच में वो है लाचार?
नहीं कोई पहचान न आसरा?
जो करे न कोई उनकी बात
न सुने उसकी कोई फरियाद
बस पाँच साल में ही वो याद आये
देखो!नेता कैसे कैसे उसे लुभाएँ
हर बार एक ही बात समझाये।
देकर वोट अपना मुझे जितायें
लोकतंत्र के नाम पर वोट का हक़ है
पर खरीद- फरोख्त में बिक जाता है
है उसका ये हक़ अनमोल
इसी मुगालते में वह जीता रहता
“आम आदमी “का सरताज़ पहने
एक दिन का राजा बन जाता
आँख -मुहँ बँद कर खड़ा वह
आम आदमी है हारा आदमी।
लेकिन जिस दिन वह मुहँ खोलेगा
जीने के अपने हक़ माँगेगा
नई राह नई दिशा देखेगा
लोक राज अधिकार पायेगा। =======================
महिमा शुक्ला। इंदौर

Language: Hindi
1 Like · 34 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
अयोध्या
अयोध्या
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी
हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी
Mukesh Kumar Sonkar
त्रेतायुग-
त्रेतायुग-
Dr.Rashmi Mishra
"वो लॉक डाउन"
Dr. Kishan tandon kranti
🌹जिन्दगी🌹
🌹जिन्दगी🌹
Dr .Shweta sood 'Madhu'
वो इँसा...
वो इँसा...
'अशांत' शेखर
जागो बहन जगा दे देश 🙏
जागो बहन जगा दे देश 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
#कविता
#कविता
*प्रणय प्रभात*
* मुस्कुराने का समय *
* मुस्कुराने का समय *
surenderpal vaidya
पास तो आना- तो बहाना था
पास तो आना- तो बहाना था"
भरत कुमार सोलंकी
पिता, इन्टरनेट युग में
पिता, इन्टरनेट युग में
Shaily
जिसके लिए कसीदे गढ़ें
जिसके लिए कसीदे गढ़ें
DrLakshman Jha Parimal
आप और हम जीवन के सच
आप और हम जीवन के सच
Neeraj Agarwal
*खाना लाठी गोलियाँ, आजादी के नाम* *(कुंडलिया)*
*खाना लाठी गोलियाँ, आजादी के नाम* *(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम
अनपढ़ दिखे समाज, बोलिए क्या स्वतंत्र हम
Pt. Brajesh Kumar Nayak
बिखरा
बिखरा
Dr.Pratibha Prakash
विराम चिह्न
विराम चिह्न
Neelam Sharma
*** आशा ही वो जहाज है....!!! ***
*** आशा ही वो जहाज है....!!! ***
VEDANTA PATEL
खो गया सपने में कोई,
खो गया सपने में कोई,
Mohan Pandey
वक्त कितना भी बुरा हो,
वक्त कितना भी बुरा हो,
Dr. Man Mohan Krishna
एक सरकारी सेवक की बेमिसाल कर्मठता / MUSAFIR BAITHA
एक सरकारी सेवक की बेमिसाल कर्मठता / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
वीर तुम बढ़े चलो...
वीर तुम बढ़े चलो...
आर एस आघात
गर्मी और नानी का घर
गर्मी और नानी का घर
कुमार
संवरना हमें भी आता है मगर,
संवरना हमें भी आता है मगर,
ओसमणी साहू 'ओश'
भ्रम
भ्रम
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
One-sided love
One-sided love
Bidyadhar Mantry
हिंदी साहित्य में लुप्त होती जनचेतना
हिंदी साहित्य में लुप्त होती जनचेतना
Dr.Archannaa Mishraa
जन्मदिन पर आपके दिल से यही शुभकामना।
जन्मदिन पर आपके दिल से यही शुभकामना।
सत्य कुमार प्रेमी
अतीत
अतीत
Mrs PUSHPA SHARMA {पुष्पा शर्मा अपराजिता}
*ताना कंटक एक समान*
*ताना कंटक एक समान*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Loading...