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14 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-115💐

हर बार मेरे गोश में कुछ कूँज रहा है,
‘एतिबार नहीं है’ ‘एतिबार नहीं है’गूँज रहा है।।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
1 Like · 239 Views
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