Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 May 2023 · 1 min read

शुद्ध

कारण संबंध है,
जिसमें घुले मिले
शब्द —-
जीत लेना चाहते,
हैं ,दुनिया—-
परन्तु,कारण ही
समाप्त हो जाय,
तब संबंध —–
पुकारते है
प्रश्न करते हैं
विचलित हो जाते हैं
ठहराव,क्षणिक
होता हैं,
शीघ्र ही प्रवाह
आता हैं
जो वाह्य दुनिया
को आन्तरिक दुनिया
की तरफ मोड़
देता है संबंध,
हार और जीत
सब बह
जाता है—-
शेष रह जाता है
निर्मल शुद्ध
जल|

Language: Hindi
173 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
साक्षात्कार एक स्वास्थ्य मंत्री से [ व्यंग्य ]
साक्षात्कार एक स्वास्थ्य मंत्री से [ व्यंग्य ]
कवि रमेशराज
बचपन की अठखेलियाँ
बचपन की अठखेलियाँ
लक्ष्मी सिंह
महाभारत एक अलग पहलू
महाभारत एक अलग पहलू
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
सुनो जीतू,
सुनो जीतू,
Jitendra kumar
प्रियतमा
प्रियतमा
Paras Nath Jha
2271.
2271.
Dr.Khedu Bharti
तोड़ डालो ये परम्परा
तोड़ डालो ये परम्परा
VINOD CHAUHAN
"आशा" की कुण्डलियाँ"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
सच अति महत्वपूर्ण यह,
सच अति महत्वपूर्ण यह,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ज़िंदगी में गीत खुशियों के ही गाना दोस्तो
ज़िंदगी में गीत खुशियों के ही गाना दोस्तो
Dr. Alpana Suhasini
मैं अपने सारे फ्रेंड्स सर्कल से कहना चाहूँगी...,
मैं अपने सारे फ्रेंड्स सर्कल से कहना चाहूँगी...,
Priya princess panwar
छठ पूजा
छठ पूजा
Satish Srijan
यूनिवर्सिटी के गलियारे
यूनिवर्सिटी के गलियारे
Surinder blackpen
तब जानोगे
तब जानोगे
विजय कुमार नामदेव
क्या हो तुम मेरे लिए (कविता)
क्या हो तुम मेरे लिए (कविता)
Monika Yadav (Rachina)
इतनी जल्दी क्यूं जाते हो,बैठो तो
इतनी जल्दी क्यूं जाते हो,बैठो तो
Shweta Soni
जागो रे बीएलओ
जागो रे बीएलओ
gurudeenverma198
आहट बता गयी
आहट बता गयी
भरत कुमार सोलंकी
लग जाए गले से गले
लग जाए गले से गले
Ankita Patel
रामकली की दिवाली
रामकली की दिवाली
Dr. Pradeep Kumar Sharma
स्वप्न बेचकर  सभी का
स्वप्न बेचकर सभी का
महेश चन्द्र त्रिपाठी
चलो मतदान कर आएँ, निभाएँ फर्ज हम अपना।
चलो मतदान कर आएँ, निभाएँ फर्ज हम अपना।
डॉ.सीमा अग्रवाल
*प्राण-प्रतिष्ठा सच पूछो तो, हुई राष्ट्र अभिमान की (गीत)*
*प्राण-प्रतिष्ठा सच पूछो तो, हुई राष्ट्र अभिमान की (गीत)*
Ravi Prakash
दूसरे का चलता है...अपनों का ख़लता है
दूसरे का चलता है...अपनों का ख़लता है
Mamta Singh Devaa
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
आ जाते हैं जब कभी, उमड़ घुमड़ घन श्याम।
आ जाते हैं जब कभी, उमड़ घुमड़ घन श्याम।
surenderpal vaidya
मां ने जब से लिख दिया, जीवन पथ का गीत।
मां ने जब से लिख दिया, जीवन पथ का गीत।
Suryakant Dwivedi
#मंगलकामनाएं
#मंगलकामनाएं
*Author प्रणय प्रभात*
दिल तोड़ना ,
दिल तोड़ना ,
Buddha Prakash
इस तरफ न अभी देख मुझे
इस तरफ न अभी देख मुझे
Indu Singh
Loading...