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25 Jan 2024 · 1 min read

शातिर हवा के ठिकाने बहुत!

है शातिर हवा के ठिकाने बहुत!
है मेरे नशेमन में नशे के मुहाने बहुत!!
सर्द हवाओं के झोंके लगते है तीरे नश्तर!
इसलिये हैं पीने-पिलाने के बहाने बहुत!!
गरीबो को मयस्सर नहीं है ,चादर-रजाई!
और रइसो के वास्ते है मयखाने बहुत!!

बोधिसत्व कस्तूरीया एडवोकेट कवि पत्रकार सिकंदरा आगरा 282007 मो;9412443094

Language: Hindi
100 Views
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