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7 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-361💐

वो जाल बिछाते रहे फिर भी न फँसा हूँ मैं,
वो मुझ पर हँसते रहे उन पर न हँसा हूँ मैं,
अभी तक नहीं गई बे-एतिबार की कसक,
दिल से निकालो तो सही,दिल में बसा हूँ मैं।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
77 Views
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