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28 May 2023 · 1 min read

मेरी शक्ति

जम गयी हूँ
इतना कि अब
पिघल न सकूँ
वाह्य ऊष्मा से
ठहर गयीं हूँ
कि अब
बह न पाऊँ,
ठहराव मेरी
कमज़ोरी नहीं
झील सी गहराई है
अपने भीतर मैंने
ख़ुद को खोज
लिया है
अब जमूं या ठहरू
सब कुछ
संचालित है
मेरी शक्ति से
मेरे लिए।

Language: Hindi
2 Likes · 516 Views
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