Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Feb 2024 · 1 min read

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति
……….
उत्तरायण हो गए तुम
राशि बदल दी तुमने
धनु से मकर में आ गए
तुम सूर्य हो,
अदम्य ओजस्वी।।

असम्भव क्या तुम्हारे लिए
न भी होते तो कौन टोकता
न बदलते राशि तो क्या होता
शुभकामनाओं के आकाश में
एक सितारा रोज चमकता है
अन्यथा,
सब जानते हैं यहां
समस्याओं की संक्रान्ति में
कोई सूर्य उदय नहीं होता..

हथेली पर सजी सूर्य रेखा
कुंडली मे सूर्य की दशा सिर्फ
आह्लाद है जीवन के चक्र का
कुम्भ है कुंभियों में खोई
हमारी मान्यताओं का..
क्यों कि हम जानते हैं…
सूर्य कभी हस्ताक्षर नहीं करता

रश्मि रथ खुद हांकना होता है
आकाश में होती होगी हे सूर्य!
जीवन के क्षितिज पर कभी
मकर संक्रांति नहीं होती।

कभी राशि नहीं बदलती।
बनना पड़ता है स्वयं सूर्य
और देना पड़ता है स्वयं
को स्वेत का अस्तित्व अर्घ्य।।
सूर्यकांत द्विवेदी

Language: Hindi
74 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
वो ख्वाब
वो ख्वाब
Mahender Singh
SC/ST HELPLINE NUMBER 14566
SC/ST HELPLINE NUMBER 14566
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
हंसगति
हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
16- उठो हिन्द के वीर जवानों
16- उठो हिन्द के वीर जवानों
Ajay Kumar Vimal
तू ही हमसफर, तू ही रास्ता, तू ही मेरी मंजिल है,
तू ही हमसफर, तू ही रास्ता, तू ही मेरी मंजिल है,
Rajesh Kumar Arjun
2929.*पूर्णिका*
2929.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
spam
spam
DR ARUN KUMAR SHASTRI
अनुभूति
अनुभूति
Pratibha Pandey
मुक्तक - जिन्दगी
मुक्तक - जिन्दगी
sushil sarna
जिंदगी बहुत ही छोटी है मेरे दोस्त
जिंदगी बहुत ही छोटी है मेरे दोस्त
कृष्णकांत गुर्जर
*
*"माँ कात्यायनी'*
Shashi kala vyas
ज़िंदगी
ज़िंदगी
Dr fauzia Naseem shad
डाइन
डाइन
अवध किशोर 'अवधू'
सत्य वह है जो रचित है
सत्य वह है जो रचित है
रुचि शर्मा
क्या ईसा भारत आये थे?
क्या ईसा भारत आये थे?
कवि रमेशराज
मैं क्या लिखूँ
मैं क्या लिखूँ
Aman Sinha
जीवन दिव्य बन जाता
जीवन दिव्य बन जाता
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
आप नहीं तो ज़िंदगी में भी कोई बात नहीं है
आप नहीं तो ज़िंदगी में भी कोई बात नहीं है
Yogini kajol Pathak
दीपावली की असीम शुभकामनाओं सहित अर्ज किया है ------
दीपावली की असीम शुभकामनाओं सहित अर्ज किया है ------
सिद्धार्थ गोरखपुरी
हब्स के बढ़ते हीं बारिश की दुआ माँगते हैं
हब्स के बढ़ते हीं बारिश की दुआ माँगते हैं
Shweta Soni
चुना था हमने जिसे देश के विकास खातिर
चुना था हमने जिसे देश के विकास खातिर
Manoj Mahato
#शेर
#शेर
*प्रणय प्रभात*
आस्था होने लगी अंधी है
आस्था होने लगी अंधी है
पूर्वार्थ
" जब तक आप लोग पढोगे नहीं, तो जानोगे कैसे,
शेखर सिंह
छटपटाता रहता है आम इंसान
छटपटाता रहता है आम इंसान
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
मन की प्रीत
मन की प्रीत
भरत कुमार सोलंकी
*डमरु (बाल कविता)*
*डमरु (बाल कविता)*
Ravi Prakash
जनता का भरोसा
जनता का भरोसा
Shekhar Chandra Mitra
जब भी दिल का
जब भी दिल का
Neelam Sharma
#सृजनएजुकेशनट्रस्ट
#सृजनएजुकेशनट्रस्ट
Rashmi Ranjan
Loading...