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18 Feb 2024 · 1 min read

बेख़ौफ़ क़लम

कुछ ऐसे मंज़र आज-कल सामने हैं
थाम कर कलम हम मोर्चे पर तने हैं…
‌ (१)
देश की बागडोर जिन्हें दी गई थी
हाय, उन्हीं के हाथ लहू में सने हैं…
(२)
चाहे जो काम कोई करा ले इनसे
गुलामी के लिए ही ये लोग बने हैं…
(३)
तेज़ाबी बारिश की जिनसे आशंका
ज़रा देखो वे बादल कितने घने हैं…
(४)
शेखर की शायरी से थोड़ा सबक लें
वे शायर जो बैठे हुए अनमने हैं…
(५)
यहां घोड़ों को घास भी मयस्सर नहीं
लेकिन गदहों के लिए गुड़ और चने हैं…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#कलम_से_क्रांति #कलम_से_इंकलाब
#कलम_या_तलवार #कलम_या_बंदूक
#पेन_गन #PenGun #विद्रोही #बागी
#लेखक #बुद्धिजीवी #पत्रकार #कवि

Language: Hindi
112 Views
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