Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jan 2024 · 1 min read

बाल कविता: वर्षा ऋतु

बाल कविता: वर्षा ऋतु

रिमझिम रिमझिम बरसे पानी,
देखो आयी ऋतु सुहानी।

बिजली चमके बादल गरजे,
लगते गगन में मटके फूटे।

पवन चले तरु झटके खाये,
लौट के पंछी घर को आये।

बहे परनाला आंगन भरता,
बैठा बंदर ओलो से डरता।

टिप टिप टिप टिप धुन बजती,
सिर पर सबके छतरी सजती।

भीगे बच्चे नाव चलाये,
छुट्टी का हिसाब लगाए।

आज भी बरसे कल भी बरसे,
पानी को ना धरती तरसे।

*********📚*********
स्वरचित कविता 📝
✍️रचनाकार:
राजेश कुमार अर्जुन

2 Likes · 55 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
#शेर
#शेर
*Author प्रणय प्रभात*
🙏
🙏
Neelam Sharma
"सबक"
Dr. Kishan tandon kranti
जय श्री राम।
जय श्री राम।
Anil Mishra Prahari
पुष्प
पुष्प
Dhirendra Singh
यूं ही हमारी दोस्ती का सिलसिला रहे।
यूं ही हमारी दोस्ती का सिलसिला रहे।
सत्य कुमार प्रेमी
शेर
शेर
Monika Verma
**तीखी नजरें आर-पार कर बैठे**
**तीखी नजरें आर-पार कर बैठे**
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
भ्रष्टाचार ने बदल डाला
भ्रष्टाचार ने बदल डाला
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
मन करता है अभी भी तेरे से मिलने का
मन करता है अभी भी तेरे से मिलने का
Ram Krishan Rastogi
*गैरों से तो संबंध जुड़ा, अपनों से पर टूट गया (हिंदी गजल)*
*गैरों से तो संबंध जुड़ा, अपनों से पर टूट गया (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
याद - दीपक नीलपदम्
याद - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
जिस के नज़र में पूरी दुनिया गलत है ?
जिस के नज़र में पूरी दुनिया गलत है ?
Sandeep Mishra
यूँ तो हम अपने दुश्मनों का भी सम्मान करते हैं
यूँ तो हम अपने दुश्मनों का भी सम्मान करते हैं
ruby kumari
अवधी गीत
अवधी गीत
प्रीतम श्रावस्तवी
जबकि तड़पता हूँ मैं रातभर
जबकि तड़पता हूँ मैं रातभर
gurudeenverma198
हर लम्हा दास्ताँ नहीं होता ।
हर लम्हा दास्ताँ नहीं होता ।
sushil sarna
2514.पूर्णिका
2514.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਗਲਿਆਰੇ
ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਗਲਿਆਰੇ
Surinder blackpen
🙏 *गुरु चरणों की धूल*🙏
🙏 *गुरु चरणों की धूल*🙏
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
आज फिर वही पहली वाली मुलाकात करनी है
आज फिर वही पहली वाली मुलाकात करनी है
पूर्वार्थ
ज़िन्दगी के
ज़िन्दगी के
Santosh Shrivastava
हमेशा एक स्त्री उम्र से नहीं
हमेशा एक स्त्री उम्र से नहीं
शेखर सिंह
बसंत का मौसम
बसंत का मौसम
Awadhesh Kumar Singh
मसीहा उतर आया है मीनारों पर
मसीहा उतर आया है मीनारों पर
Maroof aalam
“शादी के बाद- मिथिला दर्शन” ( संस्मरण )
“शादी के बाद- मिथिला दर्शन” ( संस्मरण )
DrLakshman Jha Parimal
जब तक दुख मिलता रहे,तब तक जिंदा आप।
जब तक दुख मिलता रहे,तब तक जिंदा आप।
Manoj Mahato
फितरत
फितरत
umesh mehra
पहला श्लोक ( भगवत गीता )
पहला श्लोक ( भगवत गीता )
Bhupendra Rawat
फागुन की अंगड़ाई
फागुन की अंगड़ाई
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
Loading...