Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Jun 2023 · 1 min read

बारिश

बारिश का मौसम क्यों घर में, सबको सबसे सुहाना लगता है।
अक्सर साथ बैठ जाते हैं सब,चाय के साथ पकौड़ी खाना अच्छा लगता है।।
सुबह देर तक सोना फिर उठ कर,चाय के लिए आवाज लगाना अच्छा लगता है।।
पहली बारिश की फुहार के पड़ते ही,बारिश में नहाना अच्छा लगता है।
पूरा दिन मस्ती का आलम और बच्चों संग, हँसना और हँसाना अच्छा लगता है।।
चारों तरफ ये हरियाली और आंगन में, चिड़ियों का चहचहाना अच्छा लगता है।
धुले हुए से आसमान पर अचानक,इंद्रधनुष का आ जाना अच्छा लगता है।।
बंद कर सब दरवाजे और खिड़की,आओ बैठ जाएं सब मिलकर।
बंद कर बिजली चला कर पंखा या ए सी,फिर पिक्चर का माहौल बनाना अच्छा लगता है।।
जब कोई उठना नहीं चाहता है तभी तो मैडम से कह चाय मंगाना अच्छा लगता है।
गुस्से से उनका देखना मुझको और फिर चाह संग पकौड़ी का आना अच्छा लगता है।।
कहे विजय बिजनौरी क्यों घर में, ये मौसम सबको सबसे सुहाना लगता है।
अक्सर साथ बैठ जाते हैं सब,चाय के साथ पकौड़ी खाना अच्छा लगता है।।

विजय कुमार अग्रवाल
विजय बिजनौरी

Language: Hindi
4 Likes · 179 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from विजय कुमार अग्रवाल
View all
You may also like:
Time Travel: Myth or Reality?
Time Travel: Myth or Reality?
Shyam Sundar Subramanian
__________________
__________________
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
कुछ याद बन
कुछ याद बन
Dr fauzia Naseem shad
नारी शक्ति का सम्मान🙏🙏
नारी शक्ति का सम्मान🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
बेमतलब सा तू मेरा‌, और‌ मैं हर मतलब से सिर्फ तेरी
बेमतलब सा तू मेरा‌, और‌ मैं हर मतलब से सिर्फ तेरी
Minakshi
जय शिव-शंकर
जय शिव-शंकर
Anil Mishra Prahari
How do you want to be loved?
How do you want to be loved?
पूर्वार्थ
गुस्सा
गुस्सा
Sûrëkhâ Rãthí
लोककवि रामचरन गुप्त के लोकगीतों में आनुप्रासिक सौंदर्य +ज्ञानेन्द्र साज़
लोककवि रामचरन गुप्त के लोकगीतों में आनुप्रासिक सौंदर्य +ज्ञानेन्द्र साज़
कवि रमेशराज
सृजन
सृजन
Prakash Chandra
मंजिल-ए-मोहब्बत
मंजिल-ए-मोहब्बत
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
"बूढ़ा" तो एक दिन
*Author प्रणय प्रभात*
लोकतंत्र
लोकतंत्र
Sandeep Pande
1
1
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
स्वदेशी
स्वदेशी
विजय कुमार अग्रवाल
दोहा त्रयी. . . . शीत
दोहा त्रयी. . . . शीत
sushil sarna
फालतू की शान औ'र रुतबे में तू पागल न हो।
फालतू की शान औ'र रुतबे में तू पागल न हो।
सत्य कुमार प्रेमी
मूर्ख बनाकर काक को, कोयल परभृत नार।
मूर्ख बनाकर काक को, कोयल परभृत नार।
डॉ.सीमा अग्रवाल
*हृदय की वेदना हर एक से कहना नहीं अच्छा (मुक्तक)*
*हृदय की वेदना हर एक से कहना नहीं अच्छा (मुक्तक)*
Ravi Prakash
मेरे शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास से -
मेरे शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास से -
kaustubh Anand chandola
💐अज्ञात के प्रति-136💐
💐अज्ञात के प्रति-136💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
Impossible means :-- I'm possible
Impossible means :-- I'm possible
Naresh Kumar Jangir
क्रव्याद
क्रव्याद
Mandar Gangal
*
*"हिंदी"*
Shashi kala vyas
यदि कोई अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं से मुक्त हो तो वह मोक्ष औ
यदि कोई अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं से मुक्त हो तो वह मोक्ष औ
Ms.Ankit Halke jha
फितरत आपकी जैसी भी हो
फितरत आपकी जैसी भी हो
Arjun Bhaskar
केहिकी करैं बुराई भइया,
केहिकी करैं बुराई भइया,
Kaushal Kumar Pandey आस
'महंगाई की मार'
'महंगाई की मार'
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
हमसे बात ना करो।
हमसे बात ना करो।
Taj Mohammad
उसकी गली से गुजरा तो वो हर लम्हा याद आया
उसकी गली से गुजरा तो वो हर लम्हा याद आया
शिव प्रताप लोधी
Loading...